उपनल कर्मचारियों को 1 मार्च 2026 से मिलेगा ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का लाभ; मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला
उपनल कर्मचारियों को 1 मार्च 2026 से मिलेगा ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का लाभ; मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला
देहरादून: उत्तराखंड सरकार के माननीय मंत्रिमंडल ने उपनल (UPNL) कार्मिकों के हक में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए मंत्रिमंडल ने उपनल कर्मचारियों को “समान कार्य के लिए समान वेतन” का लाभ प्रदान करने पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सरकार के इस कदम से राज्य के हजारों उपनल कार्मिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
15 अक्टूबर 2024 तय की गई ‘कट-ऑफ डेट’
शासकीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपनल कार्मिकों को इस योजना के दायरे में लाने और पात्रता सुनिश्चित करने के लिए 15 अक्टूबर 2024 (15-10-2024) को ‘कट-ऑफ डेट’ (निर्णायक तिथि) निर्धारित किया गया है। इस तिथि के आधार पर ही योग्य कार्मिकों को “समान कार्य के लिए समान वेतन” का लाभ देने की रूपरेखा तैयार की गई है।
1 मार्च 2026 से लागू होगा वित्तीय लाभ
मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, उपनल कार्मिकों को “समान कार्य के लिए समान वेतन” का वास्तविक और प्रभावी लाभ 01 मार्च 2026 से प्रदान किया जाएगा। इस तिथि से पात्र कर्मचारियों के वेतनमान में विसंगतियों को दूर कर उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान कार्य के बदले समान मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा।
मंत्रिमंडलीय उप-समिति (Cabinet Sub-Committee) को सौंपा गया जिम्मा
इस बड़े निर्णय को धरातल पर उतारने, इसकी जटिलताओं को दूर करने और आवश्यक नियम व व्यवस्थाएं (Modalities) तय करने के लिए पूरे प्रकरण को मंत्रिमंडलीय उप-समिति के समक्ष संदर्भित कर दिया गया है।
विस्तृत विचार-विमर्श: यह उप-समिति इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने की प्रक्रिया पर विस्तृत समीक्षा करेगी।
अंतिम संस्तुति: उप-समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें (Recommendations) तैयार कर पुनः मंत्रिमंडल के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत करेगी।
भविष्य के मुद्दों का भी होगा स्थायी समाधान
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह उप-समिति न केवल वर्तमान नियमावली तय करेगी, बल्कि उपनल कार्मिकों से संबंधित अन्य लंबित विषयों और भविष्य में उत्पन्न होने वाले किसी भी नीतिगत या प्रशासनिक मुद्दे पर भी विचार करेगी। समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वह आवश्यक अग्रिम कार्रवाई करते हुए समय-समय पर अपनी संस्तुतियां सरकार को सौंपेगी, ताकि कार्मिकों के हितों की स्थायी रक्षा की जा सके।
