चिंताजनक: देश में मॉनसून की रफ्तार थमी, जून में बारिश की कमी बढ़कर 42% हुई; सूखा संकट गहराने की आशंका
चिंताजनक: देश में मॉनसून की रफ्तार थमी, जून में बारिश की कमी बढ़कर 42% हुई; सूखा संकट गहराने की आशंका
नई दिल्ली: भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की सुस्त रफ्तार ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। लगातार तीसरे साल जून के महीने में मॉनसून ने लंबा ब्रेक लिया है, जिससे देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने लगे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 4 जून से 18 जून के बीच देश भर में बारिश की कमी बढ़कर 42 फीसदी तक पहुंच गई है। इस अवधि में जहां सामान्य तौर पर 72.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं देश में केवल 42.1 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है।
देश के बड़े इलाके सूखे की ओर, मुंबई में एक दशक का सबसे सूखा जून
आईएमडी के जिलेवार बारिश के ताजा नक्शे से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस समय बारिश की कमी (-20% से -59%) या बेहद भारी कमी (-60% से -90%) वाली श्रेणी में आ चुका है। केवल उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में ही सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इस सुस्त रफ्तार का सबसे बड़ा असर महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले एक दशक (10 साल) का सबसे सूखा जून दर्ज किया गया है, जिसके चलते प्रशासन को पानी की आपूर्ति और खपत पर पाबंदियां लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा विदर्भ और मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के किसान खरीफ फसलों के लिए मॉनसून के जोर पकड़ने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज: क्यों रूठ गया मॉनसून?
18 जून को INSAT-3DS सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से साफ हुआ है कि मॉनसून के आगे बढ़ने का सिस्टम फिलहाल पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है:
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का खलल: सैटेलाइट इमेज में पश्चिमी हिमालय और उससे सटे उत्तरी इलाकों में बादलों का घना जमावड़ा दिख रहा है, जो एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण है। इस विक्षोभ ने मॉनसून के सामान्य बहाव को रोक दिया है, जिससे नमी वाली हवाएं मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत के अंदरूनी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
साफ आसमान और कमजोर सिस्टम: देश के मुख्य मॉनसून क्षेत्र यानी मध्य भारत, महाराष्ट्र और गुजरात का ज्यादातर हिस्सा बादलों से पूरी तरह मुक्त (साफ) बना हुआ है।
कमजोर समुद्री शाखाएं: अरब सागर से उठने वाली मॉनसून की शाखा काफी कमजोर पड़ गई है और पश्चिमी तट पर घने बादलों की गतिविधि सीमित है। वहीं, बंगाल की खाड़ी वाली शाखा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में केवल कहीं-कहीं ही सक्रिय नजर आ रही है।
रिकवरी की उम्मीदें कमजोर, जून के अंत तक संकट संभव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊपरी वायुमंडल की प्रतिकूल स्थितियां मॉनसून को उत्तर की ओर बढ़ने से रोक रही हैं, जिससे यह कई दिनों से एक ही जगह पर थमा हुआ है।
जून का तीसरा हफ़्ता बीतने को है और अब तक हुई भारी कमी की भरपाई करने के लिए मॉनसून को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों तरफ से बहुत मजबूत सिस्टम की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा सैटेलाइट संकेतों में ऐसी किसी तेजी के आसार नहीं दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले हफ्ते तक समुद्र में कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) नहीं बनता, तो जून के आखिर तक बारिश की यह कमी बरकरार रहेगी, जिससे कृषि और जल संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
