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NCRPB की 42वीं बैठक: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बसेंगे 4 आधुनिक ‘नमो शहर’, 15 अगस्त तक तय होंगी जगहें

NCRPB की 42वीं बैठक: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बसेंगे 4 आधुनिक ‘नमो शहर’, 15 अगस्त तक तय होंगी जगहें

​नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं वार्षिक बैठक में दिल्ली-एनसीआर के भविष्य को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले किए गए हैं। एनसीआर में लगातार बढ़ती आबादी और आवास की जरूरतों को देखते हुए क्षेत्र के चारों राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 1-1 अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड शहर बसाने को मंजूरी दी गई है। इन आधुनिक शहरों को ‘नमो नोड्स’ (Namo Nodes) नाम दिया जाएगा।

​केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री एके शर्मा शामिल हुए।

​5 साल में खर्च होंगे ₹5,000 करोड़, यूपी के इन विकल्पों पर चर्चा

​इन नए ‘नमो भारत शहरों’ के विकास पर अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये शहर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में बने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की तर्ज पर विकसित होंगे, जहां वर्ल्ड क्लास एजुकेशन, हेल्थ, टेक और इंडस्ट्री क्लस्टर मौजूद होंगे।

​उत्तर प्रदेश का प्रस्ताव: यूपी सरकार ने नमो शहर के लिए नोएडा, दादरी, जेवर और बुलंदशहर का विकल्प सुझाया है। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट चालू होने के कारण इसे सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इसके अलावा ‘न्यू नोएडा’ के मास्टर प्लान पर भी काम चल रहा है।

​समय सीमा: नमो शहरों के तौर-तरीके तय करने के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जो 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी और तभी इन शहरों की अंतिम जगहों पर मुहर लगेगी।

​अगले 15 साल में 15 करोड़ होगी एनसीआर की आबादी

​रीजनल ड्राफ्ट प्लान 2041 के अनुसार, अगले 15 वर्षों में एनसीआर की आबादी दोगुनी होकर 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें से 67 फीसदी शहरी आबादी होगी। इस स्थिति में आने वाले समय में करीब 3 से 4 करोड़ लोगों के लिए नए घरों की आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए एनसीआर को अब 4 जोन में बांटा जाएगा:

​राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCT Delhi)

​सेंट्रल एनसीआर: दिल्ली के बाहर ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का 5 किलोमीटर का दायरा।

​हाईवे कॉरिडोर और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट ज़ोन: एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल के आसपास का क्षेत्र।

​शेष एनसीआर का हिस्सा

​हरियाणा की सीमाएं रहेंगी यथावत: बैठक में स्पष्ट किया गया कि हरियाणा की एनसीआर सीमाएं वैसी ही रहेंगी। राज्य के सभी 14 जिले (करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी सहित) एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे। एनसीआर का मौजूदा 55,083 वर्ग किलोमीटर का कुल इलाका बरकरार रहेगा।

​’30-मिनट एनसीआर’ और नमो भारत ट्रेन के नए रूट

​बैठक में ’30-मिनट एनसीआर’ प्रोजेक्ट के तहत कनेक्टिविटी को बेहद सुपरफास्ट बनाने पर चर्चा हुई, ताकि रैपिड रेल कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से एनसीआर के किसी भी बड़े शहर तक महज आधे घंटे में पहुंचा जा सके। इसके तहत निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर बात हुई:

​दिल्ली-पानीपत-करनाल, दिल्ली-अलवर, दिल्ली-नोएडा एयरपोर्ट और गुरुग्राम-मानेसर रूट की रैपिड रेल (नमो भारत) परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

​शहरों के बीच आवाजाही को और सुगम बनाने के लिए हेली-टैक्सी (हेलीकॉप्टर सेवा) शुरू करने पर भी विचार किया गया।

​पर्यावरण संरक्षण के तहत एनसीआर में BS-6 से नीचे के वाहनों में बदलाव की योजना को भी मंजूरी दी गई।

​जापान से भी बड़ा सिटी क्लस्टर हब बनेगा एनसीआर

​आने वाले समय में ईस्टर्न-वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल, बुलेट ट्रेन, मैन्युफैक्चरिंग सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब के साथ-साथ जापानी सिटी, सिंगापुर सिटी और ग्रेटर नोएडा फिल्म सिटी जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के कारण एनसीआर में बड़ा रियल एस्टेट बूम आने वाला है। बेहतरीन कनेक्टिविटी और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर के दम पर दिल्ली-एनसीआर आने वाले वक्त में जापान से भी बड़ा ग्लोबल सिटी क्लस्टर हब बनकर उभरेगा। बोर्ड की अगली (43वीं) बैठक दिसंबर में आयोजित की जाएगी।

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