Friday, June 19, 2026
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अंकिता भंडारी केस: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट मामले में पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर को मिली जमानत

अंकिता भंडारी केस: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट मामले में पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर को मिली जमानत

​देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किए गए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। देहरादून की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) रवि प्रकाश की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरेश राठौर की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

​पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ देहरादून के डालनवाला कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज था। पुलिस ने 14 जून 2026 को इस मामले में बीएनएस की धारा 308 (6) बढ़ाई थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था।

​अदालत में बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें

​जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी सुरेश राठौर पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। इससे पहले उन्हें बीएनएसएस की धारा 35 (3) के तहत नोटिस देकर छोड़ा भी गया था। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जिन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, वे ज्यादातर जमानती (Bailable) प्रकृति की हैं।

​दूसरी ओर, सरकारी वकील (अभियोजन पक्ष) ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं और मामले की विवेचना अभी जारी है, इसलिए इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और जोड़ी गई अतिरिक्त धारा भी जमानती है, जिसके आधार पर जमानत मंजूर कर ली गई।

​क्या था मामला जिसने उत्तराखंड की सियासत में ला दिया भूचाल?

​यह पूरा विवाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी व अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे ऑडियो और वीडियो साझा किए, जिसमें उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था।

​भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने 5 जनवरी को देहरादून के डालनवाला थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि साजिश के तहत झूठे ऑडियो-वीडियो प्रसारित कर उन्हें और अन्य नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद हरिद्वार के झबरेड़ा, बहादराबाद और देहरादून के नेहरू कॉलोनी व डालनवाला थानों में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

​कथित ‘VIP’ के जिक्र से फिर सुलग उठा था अंकिता हत्याकांड

​इन वायरल ऑडियो-वीडियो में अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े एक कथित ‘वीआईपी’ (VIP) का जिक्र किया गया था। इस खुलासे के बाद ठंडे बस्ते में जा चुका यह तीन साल पुराना संवेदनशील मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। पूरे प्रदेश में भारी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए और जनता सड़कों पर उतर आई। विपक्ष और जनता सरकार से लगातार सवाल पूछने लगे कि आखिर वह ‘वीआईपी’ कौन है?

​मामले को तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति को संभालने के लिए अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए 9 जनवरी को इस पूरे हत्याकांड की जांच देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) से कराने की संस्तुति कर दी थी।

​हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, बीजेपी से पहले ही हो चुके हैं निष्कासित

​यह कानूनी लड़ाई नैनीताल हाईकोर्ट भी पहुंच चुकी है। हाल ही में हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज 4 एफआईआर में से 2 को रद्द कर दिया था, जबकि बाकी बची 2 एफआईआर पर पुलिस को जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसी जांच के आधार पर देहरादून पुलिस और एसओजी की टीम ने 14 जून को सुरेश राठौर को हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।

​गौरतलब है कि विवादों और चौंकाने वाले बयानों के चलते भाजपा सुरेश राठौर को पहले ही पार्टी से निष्कासित कर चुकी है। फिलहाल अदालत से जमानत मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन मामले की पुलिसिया और कानूनी जांच जारी रहेगी।

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