Friday, June 19, 2026
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हरिद्वार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा ‘पारद शिवलिंग’: 5,211 किलो है वजन, लिम्का और एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

हरिद्वार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा ‘पारद शिवलिंग’: 5,211 किलो है वजन, लिम्का और एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

​हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में बहादराबाद टोल प्लाजा के पास स्थित ‘श्री साई शिव गंगा धाम’ में एक ऐतिहासिक और अलौकिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। धाम में वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य संत समागम के बीच विश्व के सबसे बड़े पारद (पारे) शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। 5,211 किलोग्राम वजनी इस अद्भुत शिवलिंग को ‘पारदेश्वर महादेव’ नाम दिया गया है। अपनी भव्यता और विशालता के कारण इस शिवलिंग का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तथा ‘एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दुनिया के सबसे बड़े पारे के शिवलिंग के रूप में दर्ज हो गया है।

​दक्षिण के कारीगरों ने 5 साल की कठिन साधना से किया तैयार

​इस पारद शिवलिंग का निर्माण कार्य वर्ष 2021 में शुरू हुआ था। दक्षिण भारत के विशेष ब्राह्मणों और कुशल कारीगरों ने देश के विभिन्न हिस्सों से पारा धातु को एकत्रित किया और कड़े परिश्रम व प्राचीन रस विद्या के नियमों का पालन करते हुए इसे ठोस आकार देकर शिवलिंग का रूप दिया।

​उद्योगपति और श्री साईं शिव गंगा धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी राजीव बंसल ने इस भव्य धाम और पारदेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया है। धाम के एक विशाल हॉल में शिरडी के साईं बाबा की भव्य मूर्ति स्थापित है, और ठीक उसके सामने इस आलौकिक पारद शिवलिंग को प्रतिष्ठित किया गया है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और लक्ष्मी-गणेश समेत सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।

​करोड़ों की आई लागत, गिनीज बुक में दर्ज कराने की तैयारी

​पारा (Mercury) एक अत्यंत महंगी और भारी धातु है, जिसका घनत्व (Density) बहुत अधिक होता है। यही वजह है कि आकार के मुकाबले इसका वजन 5,211 किलोग्राम तक पहुंच गया। ट्रस्टियों के अनुसार, इसके निर्माण में करोड़ों रुपये की लागत आई है, हालांकि उन्होंने खर्च का सटीक आंकड़ा साझा न करते हुए केवल भगवान शिव को ‘अनमोल’ बताया।

​मुख्य ट्रस्टी राजीव बंसल ने बताया कि लिम्का और एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से ट्रस्ट को प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) मिल चुका है। अब इस ऐतिहासिक शिवलिंग का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।

​संतों ने बताया ऋषियों की ‘रस विद्या’ का चमत्कार

​प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर हरिद्वार में देश के शीर्ष संतों का समागम हुआ, जिन्होंने पारदेश्वर महादेव की महिमा का बखान किया:

​आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज (निरंजन पीठ): उन्होंने कहा कि तरल पारे को बांधकर ठोस शिवलिंग का रूप देना हमारे प्राचीन ऋषियों की रस विद्या का एक महान वैज्ञानिक चमत्कार है। गुरु रघुनाथ यमूल की प्रेरणा से राजीव बंसल ने सनातन धर्म को एक अद्भुत उपहार दिया है। आगामी कांवड़ मेले में आने वाले करोड़ों शिवभक्तों के लिए यह प्रमुख आस्था का केंद्र बनेगा।

​जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्रम महाराज: उन्होंने कहा कि पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानवता के आध्यात्मिक उत्थान, विश्व शांति और सनातन धर्म के संरक्षण का एक दिव्य अभियान है।

​स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज (जूना पीठ): उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कलयुग में पारद शिवलिंग की उपासना से शीघ्र फल प्राप्त होता है। यह शिवलिंग रोग, शोक और दरिद्रता का नाश करने वाला है।

​साध्वी ऋतम्भरा दीदी: उन्होंने नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर ओजस्वी विचार रखते हुए कहा कि ‘शिव ही सत्य हैं और शिव ही सुंदर हैं’। इस स्थापना से हरिद्वार की महिमा वैश्विक स्तर पर और बढ़ेगी।

​इस भव्य समारोह में महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज, श्रीमहंत भगतराम महाराज, निर्मल अखाड़े के स्वामी ज्ञानदेव महाराज, महंत विष्णु दास और विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित कई दिग्गजों ने सहभागिता की। संतों ने सर्वसम्मति से कहा कि यह आयोजन आने वाले समय में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ऊर्जा का एक बहुत बड़ा केंद्र साबित होगा।

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