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ग्रीनलैंड शिफ्ट: भूवैज्ञानिक रूप से द्वीप पहले से ही ‘अमेरिका की ओर’ है—ट्रंप के दावे में छिपी साइंस की सच्चाई!

ग्रीनलैंड शिफ्ट: भूवैज्ञानिक रूप से द्वीप पहले से ही ‘अमेरिका की ओर’ है—ट्रंप के दावे में छिपी साइंस की सच्चाई!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को ‘खरीदने’ या नियंत्रण में लेने के लगातार दावों के बीच एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक सच्चाई सामने आई है—ग्रीनलैंड पहले से ही उत्तर अमेरिकी टेक्टॉनिक प्लेट पर सवार है! यानी भूवैज्ञानिक दृष्टि से यह द्वीप लाखों सालों से ‘अमेरिका की ओर’ खिसक रहा है, और राजनीति से दूर पृथ्वी की प्लेटें पहले ही फैसला सुना चुकी हैं।

हाल के दिनों में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘जरूरी’ बताते हुए डेनमार्क पर दबाव बनाया, टैरिफ की धमकी दी (जिसे बाद में वापस लिया गया), और यहां तक कहा कि यह “नॉर्थ अमेरिका का हिस्सा” है। डावोस में दिए भाषण में उन्होंने बल प्रयोग से इनकार किया और NATO के साथ ‘फ्यूचर डील’ का फ्रेमवर्क घोषित किया। लेकिन अब साइंस कह रही है—ट्रंप का दावा आंशिक रूप से सही है, लेकिन सिर्फ जियोलॉजी के लिहाज से!

क्या कहती है साइंस?

ग्रीनलैंड नॉर्थ अमेरिकन प्लेट पर स्थित है, जो कनाडा और अमेरिका के साथ जुड़ी हुई है।

पिछले कुछ दशकों में GPS डेटा से पता चला है कि ग्रीनलैंड उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 23 मिलीमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से खिसक रहा है—यह पूरी प्लेट की गति है।

Journal of Geophysical Research में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन (2024-25) ने पुष्टि की कि ग्रीनलैंड उत्तर अमेरिकी प्लेट के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा है, और लैब्राडोर सी की रिफ्टिंग के बाद से यह कनाडा के साथ ‘मूव’ कर रहा है।

पिछले आइस एज के ‘घोस्ट’ इफेक्ट (पिघली बर्फ की वजह से क्रस्ट का एडजस्टमेंट) से द्वीप सिकुड़ भी रहा है और कुछ हिस्सों में कनाडा की ओर ‘पुल’ हो रहा है।

यह ‘शिफ्ट’ लाखों साल पुरानी प्रक्रिया है—100 मिलियन साल पहले ग्रीनलैंड दक्षिण से उत्तर की ओर आया था, और अब यह आर्कटिक में स्थिर (लेकिन प्लेट के साथ मूविंग) है। ट्रंप के “यह हमारा टेरिटरी है” वाले बयान को कुछ मीडिया ने मजाकिया तरीके से जोड़ा—’पॉलिटिक्स में नहीं, लेकिन जियोलॉजी में ग्रीनलैंड पहले से ही अमेरिका के साथ है!’

ट्रंप का दांव और वैश्विक तनाव

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को रूस-चीन के खतरे से बचाने, आर्कटिक में मिलिट्री बेस बढ़ाने और दुर्लभ मिनरल्स (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) पर कंट्रोल के लिए ‘जरूरी’ बताया। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोग इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं—न्यूक में विरोध प्रदर्शन हुए, और ग्रीनलैंड के पीएम ने कहा, “हम अमेरिका के अधीन नहीं रहना चाहते।”

NATO चीफ मार्क रुट्टे के साथ मीटिंग के बाद ट्रंप ने टैरिफ वापस ली और ‘आर्कटिक सिक्योरिटी’ पर डील का फ्रेमवर्क बताया, लेकिन डेनमार्क की संप्रभुता पर कोई चर्चा नहीं हुई। यूरोपीय देशों ने अतिरिक्त सैनिक भेजे, और विशेषज्ञ कहते हैं कि यह NATO के लिए बड़ा टेस्ट है।

निष्कर्ष: साइंस vs पॉलिटिक्स

भूवैज्ञानिक रूप से ग्रीनलैंड ‘US की ओर’ पहले से खिसक रहा है—लेकिन यह मिलीमीटर प्रति साल की गति है, न कि कोई राजनीतिक ‘शिफ्ट’। ट्रंप का फोकस मिलिट्री, मिनरल्स और आर्कटिक डोमिनेंस पर है, जबकि ग्रीनलैंड के 57,000 निवासी (ज्यादातर इनुइट) अपनी स्वायत्तता और स्वतंत्रता चाहते हैं।

क्या पृथ्वी की प्लेटें ट्रंप के दावे को ‘सपोर्ट’ कर रही हैं? या यह सिर्फ एक मजेदार संयोग है? फिलहाल, ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है—और दुनिया देख रही है कि आखिर ‘शिफ्ट’ किस दिशा में जाता है!

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