नोएडा में युवराज मेहता की मौत: ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का एंगल क्यों जोड़ा जा रहा है—सिस्टम की लापरवाही छिपाने की कोशिश?
नोएडा में युवराज मेहता की मौत: ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का एंगल क्यों जोड़ा जा रहा है—सिस्टम की लापरवाही छिपाने की कोशिश?
27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिला कर रख दिया है। 16-17 जनवरी की मध्यरात्रि को घने कोहरे में उनकी कार सेक्टर-150 के एक निर्माणाधीन प्लॉट के 70 फुट गहरे, पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। युवराज करीब 90 मिनट तक कार की छत पर चढ़कर मदद की गुहार लगाते रहे, पिता से फोन पर रोते-चिल्लाते रहे—”पापा, मुझे बचा लो, मैं डूब रहा हूं”—लेकिन रेस्क्यू टीम पानी में नहीं उतरी। आखिरकार दम घुटने और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इसे साफ कर दिया है।
मामला अब सिर्फ हादसा नहीं रहा—यह सिस्टम की क्रूर लापरवाही, प्रशासनिक नाकामी और जवाबदेही से बचने की कोशिश का प्रतीक बन गया है। एसआईटी जांच चल रही है, बिल्डरों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, नोएडा अथॉरिटी के सीईओ हटाए गए हैं। लेकिन सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अब ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का एंगल जोड़ा जा रहा है, जिसे परिवार और कई नागरिक “घिनौनी कोशिश” बता रहे हैं।
क्यों उठ रहा ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का सवाल?
– CCTV फुटेज से पता चला कि युवराज ऑफिस पार्टी में मैनहट्टन बार एंड रेस्ट्रो (सेक्टर-43) गए थे, जहां वे करीब तीन घंटे रहे और शराब पी। उसके बाद उन्होंने लगभग 60 किमी ड्राइव की और घर लौट रहे थे।
– कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे “पब में पार्टी के बाद तेज रफ्तार” बताकर हादसे की वजह युवराज की लापरवाही पर डालने की कोशिश की जा रही है।
– पुलिस और कुछ पक्षों का कहना है कि घना कोहरा था, जीरो विजिबिलिटी थी, लेकिन साथ ही “रैश ड्राइविंग” का जिक्र भी आ रहा है।
परिवार और जनता का गुस्सा: यह डिफ्लेक्शन क्यों?
युवराज के पिता और परिवार ने बार-बार कहा है कि असली वजह अनमार्क्ड, बिना बैरिकेडिंग वाला गहरा गड्ढा था, जो सालों से खुला पड़ा था। पहले भी एक ट्रक इसी जगह गिर चुका था, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। रेस्क्यू में देरी, पुलिस-फायर ब्रिगेड की निष्क्रियता और “पानी ठंडा है” जैसे बहाने—ये सब सिस्टम की नाकामी हैं।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स लिख रहे हैं:
– “मरने वाले को दोषी ठहराकर बिल्डर, अथॉरिटी और पुलिस बच रही है।”
– “पब गया था, तो क्या? क्या शराब पीने वाले को मौत का हक नहीं मिलता? गड्ढा क्यों नहीं ढका?”
– “यह पोस्टह्यूमस कैरेक्टर असैसिनेशन है—सिस्टम की लिंचिंग छिपाने के लिए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्लड अल्कोहल टेस्ट हुआ भी (जो अभी तक रिपोर्ट में नहीं आया), तो भी मुख्य जिम्मेदारी निर्माण कंपनी, नोएडा अथॉरिटी और रेस्क्यू टीम की है। अनमार्क्ड खतरनाक जगह छोड़ना IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध है।
एसआईटी अब हर एंगल जांच रही है—CCTV, वitness स्टेटमेंट्स, रेस्क्यू लॉग और पिछले हादसों का रिकॉर्ड। लेकिन जनता का सवाल साफ है: क्या युवराज की मौत को “ड्रिंक एंड ड्राइव” बताकर असली दोषियों को बचाया जा रहा है?
यह केस अब सिर्फ एक हादसा नहीं—यह शहरी सुरक्षा, जवाबदेही और मानवीय संवेदना की परीक्षा है। न्याय की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन सवाल उठता रहेगा: असली दोषी कौन?
