बंगाल चुनाव: दूसरे चरण का प्रचार थमा, अंतिम दिन उत्तर 24 परगना में भारी हिंसा, CISF जवान को लगी गोली
बंगाल चुनाव: दूसरे चरण का प्रचार थमा, अंतिम दिन उत्तर 24 परगना में भारी हिंसा, CISF जवान को लगी गोली
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य में चुनावी हिंसा का तांडव जारी है। उत्तर 24 परगना के जगद्दल इलाके में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई। पुलिस स्टेशन के बाहर हुए इस खूनी संघर्ष में बमबारी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें ड्यूटी पर तैनात CISF के एक जवान को गोली लग गई है।
थाने के बाहर रणक्षेत्र बना इलाका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगद्दल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार डॉ. राजेश कुमार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक विवादित टिप्पणी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उनके साथ भाजपा नेता अर्जुन सिंह और उनके बेटे पवन सिंह भी मौजूद थे। इसी दौरान थाने के बाहर TMC और BJP समर्थक आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पथराव के साथ-साथ बम भी फेंके गए।
गोलीबारी में सुरक्षाकर्मी घायल
घटना के दौरान हुई अंधाधुंध फायरिंग में CISF के जवान पवन सिंह के बाएं पैर में गोली लग गई। उन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद TMC के ‘गुंडों’ ने उन पर जानलेवा हमला किया।
भाजपा उम्मीदवार का आरोप: ‘योजनाबद्ध था हमला’
भाटपारा से भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए कहा:
”कल हमारी बैठक के दौरान ही टीएमसी के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया था। आज जब हम प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत की तैयारी कर रहे थे, तो उन्होंने फिर से विवाद किया। मामला शांत होने के बाद जब हम घर लौट रहे थे, तभी अचानक पत्थरबाजी, बमबारी और फायरिंग शुरू हो गई।”
29 अप्रैल को अंतिम प्रहार
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में हुए भारी मतदान के बाद अब सबकी नजरें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे और अंतिम चरण के मतदान पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जहाँ भाजपा के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने अपनी रैलियों के जरिए टीएमसी का किला बचाने की कोशिश की है।
चुनाव आयोग ने इस ताजा हिंसा को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। जगद्दल की इस घटना ने एक बार फिर चुनाव के दौरान सुरक्षा इंतजामों और शांतिपूर्ण मतदान की संभावनाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
