कान्हा की नगरी पहुंचे ‘हीरो नंबर वन’: गोविंदा ने किए बांके बिहारी के दर्शन, प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद
कान्हा की नगरी पहुंचे ‘हीरो नंबर वन’: गोविंदा ने किए बांके बिहारी के दर्शन, प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद
वृंदावन: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘हीरो नंबर वन’ के नाम से मशहूर गोविंदा सोमवार को अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए कान्हा की नगरी वृंदावन पहुंचे। भक्ति के रंग में रंगे अभिनेता ने न केवल विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में माथा टेका, बल्कि प्रख्यात संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
बांके बिहारी के चरणों में हुए भावुक
वृंदावन पहुंचते ही गोविंदा सीधे ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। वहां मंदिर के सेवायत पुजारियों ने विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ उन्हें पूजा-अर्चना कराई। दर्शन के उपरांत गोविंदा काफी भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
”वृंदावन की पावन माटी और बांके बिहारी के चरणों में जो सुकून मिलता है, वह कहीं और नहीं। यहां आने से मन को असीम शांति मिलती है।”
ज्ञात हो कि गोविंदा का वृंदावन से पुराना नाता है और वे अक्सर आध्यात्मिक शांति की तलाश में यहाँ आते रहते हैं।
संत प्रेमानंद महाराज के सत्संग में हुए शामिल
मंदिर में दर्शन के पश्चात गोविंदा ‘राधा निवास’ पहुंचे। वहां उन्होंने वर्तमान समय के अत्यंत पूज्य संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज से भेंट की। गोविंदा महाराज जी के चरणों में बैठकर काफी देर तक आध्यात्मिक चर्चा करते दिखे। उन्होंने जीवन के गूढ़ रहस्यों और सही मार्गदर्शन के लिए महाराज जी से आशीर्वाद लिया। सोशल मीडिया पर गोविंदा और महाराज जी की सादगी भरी तस्वीरें अब तेजी से वायरल हो रही हैं।
फैंस का उमड़ा सैलाब
जैसे ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों को गोविंदा के आने की खबर मिली, मंदिर परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। अपने पसंदीदा सुपरस्टार की एक झलक पाने के लिए फैंस में जबरदस्त उत्साह देखा गया। भीड़ इतनी बढ़ गई कि सुरक्षा कर्मियों को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। गोविंदा ने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में हाथ जोड़कर और मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार किया।
वृंदावन: प्रेम और भक्ति का स्वरूप
अपनी यात्रा के अंत में गोविंदा ने वृंदावन की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि यह पावन नगरी केवल एक स्थान नहीं, बल्कि साक्षात् प्रेम और भक्ति का स्वरूप है। उन्होंने बताया कि यहाँ आने के बाद व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से दूर प्रभु की भक्ति में पूरी तरह लीन हो जाता है।
