DRDO का स्वदेशी ‘जल-थल’ योद्धा तैयार: ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और गहरी नदियों को चीरकर निकलेगा यह नया आर्मर्ड व्हीकल
DRDO का स्वदेशी ‘जल-थल’ योद्धा तैयार: ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और गहरी नदियों को चीरकर निकलेगा यह नया आर्मर्ड व्हीकल
नई दिल्ली: भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना की मारक क्षमता और दुर्गम क्षेत्रों में उसकी पहुंच को बढ़ाने के लिए एक ऐसा अत्याधुनिक आर्मर्ड व्हीकल (Armored Vehicle) विकसित किया गया है, जो न केवल पहाड़ों की सीधी चढ़ाई चढ़ने में सक्षम है, बल्कि किसी नाव की तरह पानी में तैरकर दुश्मन के दांत खट्टे कर सकता है।
एक वाहन, अनेक खूबियाँ: क्या है इसकी खासियत?
DRDO द्वारा विकसित इस स्वदेशी बख्तरबंद वाहन को भारतीय सीमाओं की विविध भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे दुनिया के चुनिंदा सैन्य वाहनों की श्रेणी में खड़ा करती हैं:
उभयचर क्षमता (Amphibious Power): यह वाहन बिना किसी बाहरी मदद के गहरी नदियों और जलाशयों को पार कर सकता है। पानी में उतरते ही यह ‘फ्लोटिंग मोड’ में आ जाता है, जिससे सेना को पुल बनाने के इंतजार के बिना त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पहाड़ों पर फौलादी पकड़: लद्दाख और सिक्किम जैसे ऊंचे युद्ध क्षेत्रों (High Altitude Areas) के लिए इसमें विशेष इंजन और ग्रिप वाले टायर/ट्रैक्स दिए गए हैं, जो कम ऑक्सीजन और बर्फीली ढलानों पर भी अपनी पूरी ताकत से काम करते हैं।
अभेद्य सुरक्षा: इस व्हीकल की बॉडी को ‘बैलिस्टिक प्रोटेक्शन’ से लैस किया गया है, जो इसे दुश्मन की गोलियों, लैंडमाइंस और छोटे धमाकों से सुरक्षित रखती है।
रणनीतिक बढ़त: चीन और पाकिस्तान सीमा पर गेमचेंजर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया आर्मर्ड व्हीकल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LOC) पर भारतीय सेना के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होगा।
त्वरित तैनाती: पूर्वी लद्दाख जैसी जगहों पर जहां नदियां और ऊंचे पहाड़ एक साथ चुनौती पेश करते हैं, वहां यह वाहन सैनिकों और हथियारों को कम समय में मोर्चे पर पहुंचा सकेगा।
सरप्राइज अटैक: पानी में तैरने की क्षमता के कारण भारतीय सेना दुश्मन को उन रास्तों से चौंका सकती है, जिन्हें अब तक ‘अगम्य’ माना जाता था।
रक्षा मंत्रालय का बयान: “यह वाहन भारतीय इंजीनियरों की कुशलता का प्रमाण है। इसे विशेष रूप से उन मोर्चों के लिए तैयार किया गया है जहां भारी टैंक नहीं पहुंच पाते। अब हमारी सेना के पास हर मौसम और हर इलाके में वार करने की शक्ति है।”
स्वदेशी तकनीक का लोहा
इस वाहन का इंजन, ट्रांसमिशन और कवच पूरी तरह से भारत में विकसित किए गए हैं। ट्रायल के दौरान इसने रेगिस्तान की तपती गर्मी से लेकर हिमालय की शून्य से नीचे वाली ठंड तक, हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। बहुत जल्द इसकी बड़ी खेप सेना के बेड़े में शामिल होने वाली है।
ब्यूरो रिपोर्ट, रक्षा एवं सुरक्षा डेस्क
