चुनावी माहौल में ‘दीदी’ का ग्राउंड कनेक्ट: भवानीपुर सब्जी बाजार पहुंचीं ममता बनर्जी, विक्रेताओं से हुई रूबरू
चुनावी माहौल में ‘दीदी’ का ग्राउंड कनेक्ट: भवानीपुर सब्जी बाजार पहुंचीं ममता बनर्जी, विक्रेताओं से हुई रूबरू
कोलकाता, 27 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के प्रचार के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपना खास अंदाज दिखाया। अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में पदयात्रा और रैली के बाद अचानक स्थानीय सब्जी बाजार पहुंच गईं। यहां उन्होंने सब्जी और फल विक्रेताओं से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और खुद खरीदारी भी की।
सफेद साड़ी और चप्पलों में दीदी बाजार की तंग गलियों में घूमती नजर आईं। दुकानों पर रुककर उन्होंने सब्जियों के दाम पूछे, विक्रेताओं से बातचीत की और आम लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलों को जाना। इस दौरान ‘दीदी-दीदी’ के नारे गूंजते रहे। ममता ने लोगों से हाथ मिलाए, मालाएं स्वीकार कीं और सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया कि भीड़ को हटाने की बजाय उन्हें पास आने दें। कई महिलाएं उनके पैर छूने के लिए उमड़ पड़ीं।
पीएम मोदी के झालमुड़ी वाले पल का जवाब?
यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ‘झालमुड़ी ब्रेक’ के कुछ दिनों बाद आई है। मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान झारग्राम में स्थानीय झालमुड़ी खाई थी, जिसे उन्होंने राजनीतिक प्रतीक बनाया। ममता का सब्जी बाजार दौरा इसे काउंटर के तौर पर देखा जा रहा है। टीएमसी इसे ‘जनता से सीधा जुड़ाव’ बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार दे रहा है।
क्या कहा विक्रेताओं और लोगों से?
ममता बनर्जी ने बाजार में महंगाई, रोजगार और दैनिक जीवन की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने महिलाओं को लक्ष्मीर भंडार जैसी योजनाओं का भरोसा दिलाया और कहा कि राज्य सरकार आम आदमी के साथ खड़ी है। विक्रेताओं ने अपनी समस्याएं बताईं, जिन्हें ममता ने गौर से सुना।
यह दौरा टीएमसी की ‘बाजार आउटरीच’ रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से पहले ग्रासरूट स्तर पर कनेक्ट बढ़ाना चाहती है।
चुनावी संदर्भ
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान हो चुके हैं और दूसरे चरण की तैयारियां जोरों पर हैं। परिणाम 4 मई को घोषित होंगे। ममता बनर्जी लगातार ईवीएम सुरक्षा, केंद्र की नीतियों और स्थानीय मुद्दों पर हमला बोल रही हैं। उनका यह अनौपचारिक बाजार दौरा ‘मिट्टी की बेटी’ वाली छवि को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी गहमागहमी में ममता का यह अंदाज एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। क्या यह आम लोगों तक पहुंचने का सच्चा प्रयास है या सिर्फ वोट बैंक की रणनीति? बंगाल की जनता 4 मई को इसका फैसला करेगी।
स्रोत: आज तक, एनडीटीवी, इंडिया टुडे, नवभारत टाइम्स और अन्य रिपोर्ट्स के आधार पर (27 अप्रैल 2026 की घटनाएं)।
यह घटनाक्रम बंगाल चुनाव को और रंगीन बना रहा है। आप क्या सोचते हैं – ममता का यह अंदाज वाकई प्रभावी है या सिर्फ दिखावा? कमेंट में जरूर बताएं!
