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बंगाल चुनाव से पहले कई जिलों में चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई: ED छापेमारी, पुलिस अधिकारियों का सस्पेंशन, क्या है असली वजह?

बंगाल चुनाव से पहले कई जिलों में चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई: ED छापेमारी, पुलिस अधिकारियों का सस्पेंशन, क्या है असली वजह?

कोलकाता, 27 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण (29 अप्रैल) से ठीक पहले कई जिलों में चुनाव आयोग (ECI) और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। ED ने PDS घोटाले समेत कई मामलों में छापेमारी की, जबकि ECI ने पक्षपात और कदाचार के आरोप में कई पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। साथ ही, राज्य में अवैध हथियार, नकदी और शराब की जब्ती भी जारी है।

मुख्य घटनाएं और छापेमारी के इलाके

ED छापेमारी: कोलकाता, बर्धमान (बर्दवान), हाबड़ा, हाबरा और अन्य जिलों में PDS (राशन घोटाला) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 9 जगहों पर तलाशी ली गई। इससे पहले भी कोलकाता और आसपास के इलाकों में कई रेड हुईं। ED ने इन कार्रवाइयों को “मुक्त, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव” सुनिश्चित करने से जोड़ा है।

ECI की कार्रवाई: डायमंड हार्बर (दक्षिण 24 परगना) में 5 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (ASP, SDPO और थाना प्रभारियों) को “गंभीर कदाचार और निष्पक्षता बनाए रखने में विफलता” के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हुई। कुछ अन्य जिलों में भी पुलिस अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लगे।

अन्य जिलों में सर्च: कई संवेदनशील इलाकों में अवैध विस्फोटक (क्रूड बम), हथियार और चुनावी खर्च से जुड़ी सामग्री की तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। ECI ने DM-SP को 24 घंटे के अंदर व्यापक तलाशी के निर्देश दिए हैं।

आखिर क्या है वजह?

चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव में अतीत में हिंसा, बूथ कब्जा, धमकी और पैसे-शराब के प्रभाव की शिकायतें आम रही हैं। इसलिए:

दूसरे चरण से पहले क्षेत्र-आधारित सुरक्षा और “एरिया डोमिनेशन” बढ़ाया गया।

केंद्रीय बलों (CAPF) की भारी तैनाती, हर बूथ पर CCTV और सख्त निगरानी।

अवैध धन, शराब, हथियार और प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाना।

स्थानीय पुलिस में पक्षपात के आरोपों पर त्वरित कार्रवाई ताकि मतदाता बिना डर के वोट डाल सकें।

ECI ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी मतदाता को डराने-धमकाने या चुनावी प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।

पृष्ठभूमि

पहले चरण (23 अप्रैल) में 16 जिलों की 152 सीटों पर रिकॉर्ड 92-93% मतदान हुआ, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा और बम की घटनाएं भी हुईं।

पूरे राज्य में मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए गए, लेकिन ECI इसे “शुद्ध मतदाता सूची” बनाने का कदम बता रहा है।

दूसरे चरण में 7 जिलों की 142 सीटों पर मतदान होगा। प्रधानमंत्री मोदी समेत बड़े नेता प्रचार में जुटे हैं।

टीएमसी ने इन छापेमारियों को “राजनीतिक साजिश” और “वोटरों को डराने की कोशिश” बताया है, जबकि BJP और विपक्ष इसे “निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का प्रयास” करार दे रहा है।

चुनाव आयोग की ये कार्रवाइयां बंगाल के दूसरे चरण को और संवेदनशील बना रही हैं। 29 अप्रैल को मतदान के बाद 4 मई को नतीजे आएंगे।

 

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