राजनीति

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका: राज्यसभा सभापति ने 7 बागी सांसदों के बीजेपी में विलय को दी मंजूरी, AAP की ताकत घटकर 3 रह गई

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका: राज्यसभा सभापति ने 7 बागी सांसदों के बीजेपी में विलय को दी मंजूरी, AAP की ताकत घटकर 3 रह गई

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में करारा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने AAP के 7 बागी सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ उच्च सदन में AAP की संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है, जबकि BJP की ताकत बढ़कर 113 हो गई है।

यह घटनाक्रम AAP के संस्थापक सदस्य राघव चड्ढा के नेतृत्व में हुआ। शुक्रवार (24 अप्रैल) को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत 7 सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP छोड़ने और BJP में शामिल होने की घोषणा की थी। उन्होंने दावा किया कि यह दो-तिहाई (7 में से 10) सदस्यों का विलय है, इसलिए एंटी-डिफेक्शन कानून (10वीं अनुसूची) लागू नहीं होता।

कौन-कौन हैं ये 7 बागी सांसद?

राघव चड्ढा

संदीप पाठक

अशोक मित्तल

स्वाति मालीवाल

हरभजन सिंह

राजिंदर गुप्ता (राजेंद्र गुप्ता)

विक्रम सिंह साहनी (विक्रमजीत सिंह साहनी)

इनमें से अधिकांश पंजाब से चुने गए थे, जबकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से हैं।

राज्यसभा में नया गणित

BJP की संख्या: 106 से बढ़कर 113

AAP की संख्या: 10 से घटकर 3

NDA की कुल ताकत: अब 149 के करीब (नॉमिनेटेड और इंडिपेंडेंट सदस्यों सहित)

यह मंजूरी BJP को राज्यसभा में और मजबूती देगी, खासकर आगामी बिलों और बहसों में।

AAP का रुख

AAP नेता संजय सिंह ने सभापति को पत्र लिखकर इन 7 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताया और कहा कि कोई संगठनात्मक स्तर पर विलय नहीं हुआ है। AAP ने संविधान विशेषज्ञों (कपिल सिब्बल समेत) से सलाह ली है और सभापति से जल्द सुनवाई की मांग की है।

राघव चड्ढा ने पार्टी में अंदरूनी कलह का हवाला देते हुए BJP जॉइन करने का फैसला लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की तारीफ भी की।

पृष्ठभूमि

यह बगावत पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जहां पार्टी सत्ता में है। दिल्ली में पहले ही AAP की स्थिति कमजोर हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विलय को दो-तिहाई माना गया तो सदस्यता बरकरार रहेगी, अन्यथा डिसक्वालिफिकेशन हो सकती है।

यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में दल-बदल और गठबंधनों की नई बहस छेड़ रहा है। BJP इसे अपनी बढ़ती स्वीकार्यता बता रही है, जबकि AAP इसे साजिश करार दे रही है।

यह विकास AAP के लिए चुनौतीपूर्ण समय को और मुश्किल बना रहा है। क्या आपको लगता है कि AAP इस संकट से उबर पाएगी या और बगावतें होंगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!

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