Monday, April 27, 2026
अन्तर्राष्ट्रीय

हथियारों की होड़ में दुनिया: $2.89 ट्रिलियन के साथ सैन्य खर्च ने तोड़ा रिकॉर्ड, SIPRI की रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ष 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च (military expenditure) 2.887 ट्रिलियन डॉलर (करीब 2.89 ट्रिलियन) तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह लगातार 11वां वर्ष है जब दुनिया भर में सैन्य बजट बढ़ा है। 2024 की तुलना में यह खर्च 2.9 प्रतिशत बढ़ा है, हालांकि अमेरिका में कमी के बावजूद यूरोप और एशिया के बढ़ते खर्च ने इस रिकॉर्ड को संभव बनाया।

SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च में वृद्धि पिछले वर्ष (2024 में 9.7 प्रतिशत) से काफी कम रही, लेकिन कुल आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले दशक (2016-2025) में सैन्य खर्च कुल 41 प्रतिशत बढ़ चुका है। सैन्य खर्च अब वैश्विक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत है, जो 2009 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। प्रति व्यक्ति सैन्य खर्च औसतन 352 डॉलर पहुंच गया।

शीर्ष खर्चकर्ता देश

अमेरिका: सबसे बड़ा खर्चकर्ता, लेकिन 2025 में 7.5 प्रतिशत की कमी के साथ 954 बिलियन डॉलर पर आ गया। ट्रंप प्रशासन द्वारा यूक्रेन को नई सैन्य सहायता रोकने का यह मुख्य कारण बताया गया।

चीन: अनुमानित 336 बिलियन डॉलर (7.4 प्रतिशत वृद्धि)।

रूस: अनुमानित 190 बिलियन डॉलर (5.9 प्रतिशत वृद्धि), जो उसके जीडीपी का 7.5 प्रतिशत है।

अन्य प्रमुख: जर्मनी, भारत और यूक्रेन (जिसने 20 प्रतिशत बढ़ाकर 84.1 बिलियन डॉलर खर्च किया, जो उसके जीडीपी का 40 प्रतिशत है)।

अमेरिका, चीन और रूस तीनों देशों का कुल योग 1.48 ट्रिलियन डॉलर है, जो वैश्विक सैन्य खर्च का आधे से ज्यादा हिस्सा है। पांच सबसे बड़े खर्चकर्ता (अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत) मिलकर विश्व के 58 प्रतिशत सैन्य खर्च के लिए जिम्मेदार हैं।

क्षेत्रीय रुझान

यूरोप: 14 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 864 बिलियन डॉलर पहुंचा। रूस-यूक्रेन युद्ध और सुरक्षा चिंताओं के कारण नाटो देशों का खर्च बढ़ा। 32 नाटो सदस्यों का कुल खर्च 1.581 ट्रिलियन डॉलर (वैश्विक का 55 प्रतिशत) रहा।

एशिया और ओशिनिया: 8.1 प्रतिशत बढ़कर 681 बिलियन डॉलर।

अमेरिका क्षेत्र में कुल खर्च घटा, लेकिन बाकी दुनिया में वृद्धि ने इसे कवर कर लिया। अमेरिका को छोड़कर बाकी दुनिया का सैन्य खर्च 9.2 प्रतिशत बढ़ा।

SIPRI ने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकटों, युद्धों और लंबी अवधि की सैन्य योजनाओं के कारण 2026 और उसके बाद भी यह वृद्धि जारी रह सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती असुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव और हथियारों की होड़ इस रिकॉर्ड का मुख्य कारण है।

चिंता का विषय

SIPRI रिपोर्ट में कहा गया है कि इतना बड़ा सैन्य खर्च सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) पर असर डाल रहा है। संसाधनों का बड़ा हिस्सा हथियारों, जहाजों, विमानों और मिसाइलों पर जा रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया कई संघर्षों (रूस-यूक्रेन, मध्य पूर्व आदि) से जूझ रही है और कई देश अपनी सेनाओं को मजबूत करने में लगे हैं।

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