डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर SC की सख्त चेतावनी: ‘तुरंत ध्यान दें, CBI को मिली खुली छूट – पैन-इंडिया जांच और भ्रष्टाचार पर भी शिकंजा’
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर SC की सख्त चेतावनी: ‘तुरंत ध्यान दें, CBI को मिली खुली छूट – पैन-इंडिया जांच और भ्रष्टाचार पर भी शिकंजा’
साइबर ठगी का नया रूप ‘डिजिटल अरेस्ट’ देशभर में हाहाकार मचा रहा है, जहां ठग वीडियो कॉल पर पुलिस या CBI अधिकारी बनकर बुजुर्गों को घर में कैद कर पैसे ऐंठ लेते हैं। इस खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोरदार चिंता जताई और तत्काल कार्रवाई के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को पैन-इंडिया जांच का जिम्मा सौंप दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जोमलया बागची की बेंच ने कहा, “यह स्कैम चिंताजनक स्तर का है। तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।” कोर्ट ने CBI को ‘फ्री हैंड’ दिया, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत बैंकों और उनके अधिकारियों की भूमिका की जांच भी शामिल है।
कोर्ट ने सुओ मोटो केस (SMW (Crl.) 3/2025) में सुनवाई के दौरान डिजिटल अरेस्ट को साइबर फ्रॉड की तीन मुख्य श्रेणियों में रखा – डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इनवेस्टमेंट स्कीम्स और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर ठगी। ज्यादातर पीड़ित सीनियर सिटिजन हैं, जिन्हें ठग गिरफ्तारी का डर दिखाकर 10-20 लाख तक उड़ा लेते हैं। अमीकस क्यूरी एन.एस. नप्पिनाई ने बताया कि हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति ने 15 दिनों में 1.5 करोड़ गंवा दिए। कोर्ट ने कहा, “यह स्कैम रुकना चाहिए। CBI पहले डिजिटल अरेस्ट केसेज की जांच करे, फिर अन्य फ्रॉड्स पर शिफ्ट हो।” बेंच ने CBI को इंटरपोल से मदद लेने की छूट दी, ताकि विदेशी टैक्स हेवन्स में छिपे ठगों को पकड़ा जा सके।
SC ने कई राज्यों – बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब समेत सभी – को दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की धारा 6 के तहत CBI को सहयोग का निर्देश दिया। विपक्ष शासित राज्यों को भी सहमति देने को कहा गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को नोटिस जारी कर पूछा गया कि फ्रॉड अकाउंट्स को फ्रीज करने के लिए AI-ML टेक्नोलॉजी क्यों नहीं इस्तेमाल हो रही? DoT को आदेश दिया कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स एक यूजर को मल्टीपल सिम न दें, जो साइबर क्राइम में दुरुपयोग हो।
सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप) को CBI को फुल कोऑपरेशन और कंटेंट डेटा देने का आदेश दिया। सभी राज्यों और UTs को साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर्स स्थापित करने को कहा गया। CJI ने कहा, “पीड़ित थाने-थाने भटक रहे हैं। स्टेट्स, UTs और पुलिस फ्रीज कर सकती हैं फ्रॉड अकाउंट्स।” अक्टूबर में कोर्ट ने केंद्र और CBI से जवाब मांगा था, और अब 15 FIRs दर्ज हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला साइबर क्राइम के खिलाफ मील का पत्थर है। 2025 में 50,000 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं, ज्यादातर बुजुर्गों के। क्या CBI की जांच ठगों पर लगाम लगाएगी? अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।
