उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम में कचरे से कमाई: नगर पंचायत ने कूड़े को बनाया ‘समृद्धि का स्रोत’, 8 लाख से ज्यादा की कमाई!

बदरीनाथ धाम में कचरे से कमाई: नगर पंचायत ने कूड़े को बनाया ‘समृद्धि का स्रोत’, 8 लाख से ज्यादा की कमाई!

चारधाम यात्रा के सबसे पवित्र धाम बदरीनाथ में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, और साथ आता है ढेर सारा कचरा। लेकिन इस बार नगर पंचायत बदरीनाथ ने कचरे को चुनौती नहीं, अवसर बना लिया। ‘स्वच्छ भारत’ के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अनोखा मॉडल पेश करते हुए पंचायत ने कूड़े का विपणन कर 2025 यात्रा सीजन में 8 लाख 42 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। यह मॉडल अब चमोली जिले की अन्य नगर पालिकाओं-पंचायतों और पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा बन गया है।

नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र असवाल ने बताया कि यात्राकाल में रोजाना 4-5 टन कचरा इकट्ठा होता है। इसके लिए पंचायत ने चाक-चौबंद व्यवस्था की:

120 पर्यावरण मित्रों की तैनाती

2 MRF (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर

2 कॉम्पैक्टर मशीनें

3 ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर मशीनें

प्लास्टिक बैग क्रशर और बेलिंग मशीन

इनके जरिए जो हुआ, वह कमाल है:

प्लास्टिक कचरे से बने ब्लॉक्स को रोड निर्माण कंपनियों को 18-22 रुपये प्रति किलो बेचा गया

गीले कचरे से बनी कम्पोस्ट खाद को 10-12 रुपये प्रति किलो पर किसानों-नर्सरी वालों को बेचा गया

कुल 42 टन प्लास्टिक और 58 टन ऑर्गेनिक कचरे का 100% निस्तारण

अध्यक्ष असवाल ने कहा, “पहले कचरा ढोने में लाखों खर्च होते थे। अब वही कचरा हमें कमाई दे रहा है। सबसे बड़ी बात – बदरीनाथ धाम अब प्लास्टिक-मुक्त और स्वच्छ दिख रहा है।” पंचायत ने इस साल 4.80 लाख रुपये प्लास्टिक ब्लॉक्स और 3.62 लाख रुपये कम्पोस्ट बेचकर कमाए।

यह मॉडल इतना कामयाब रहा कि चमोली DM स्वाति भदौरिया ने सभी पंचायतों को निर्देश दिए कि बदरीनाथ पैटर्न अपनाएं। जोशीमठ, गोपेश्वर और कर्णप्रयाग नगर पालिकाएं जल्द ही MRF सेंटर शुरू करने जा रही हैं। उत्तराखंड स्वच्छता मिशन के निदेशक ने कहा, “यह देश का पहला ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां कचरे से कमाई और शून्य वेस्ट का लक्ष्य दोनों हासिल हुए।”

श्रद्धालुओं ने भी तारीफ की। एक यात्री बोले, “पहले प्लास्टिक हर जगह बिखरा रहता था। अब साफ-सुथरा लगता है और मालूम चला कि कचरा भी कमाई का जरिया बन सकता है।”

बदरीनाथ अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता का मॉडल भी बन गया है। कचरा नहीं, समृद्धि का आधार!

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