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दिल्ली-NCR के जहरीले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: ‘चुप नहीं बैठ सकते, हर नागरिक का स्वास्थ्य खतरे में’

दिल्ली-NCR के जहरीले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: ‘चुप नहीं बैठ सकते, हर नागरिक का स्वास्थ्य खतरे में’

दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना मुश्किल हो गया है। हवा का AQI 300 से ऊपर पहुंच चुका है, और स्मॉग की परत पूरे इलाके को ढक रही है। इस संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोरदार प्रतिक्रिया दी, कहा कि “हम चुप नहीं बैठ सकते”। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने GRAP-4 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के कड़े प्रतिबंधों को जारी रखने का आदेश दिया, जब तक AQI में गिरावट न दिखे। कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के मुख्य सचिवों को 5 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर होने का निर्देश दिया, ताकि कार्यान्वयन की समीक्षा हो।

कोर्ट ने कार्यान्वयन में लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। MCD, दिल्ली पुलिस, DPCC और अन्य एजेंसियों के बीच “पूर्ण समन्वय की कमी” को हाइलाइट करते हुए कहा कि CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) को इनकी गतिविधियों को समन्योजित करना होगा। ट्रक एंट्री बैन का पालन न होने पर दिल्ली सरकार, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा, “यह स्वास्थ्य आपातकाल है। हर NCR निवासी इस खतरे का सामना कर रहा है।” CJI ने जोर दिया कि प्रदूषण का कोई एक कारण नहीं, लेकिन निरंतर निगरानी जरूरी है।

यह टिप्पणी PIL पर सुनवाई के दौरान आई, जहां एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने AQI की बिगड़ती स्थिति पर ध्यान दिलाया। कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में स्पोर्ट्स इवेंट्स पर रोक लगे, क्योंकि नवंबर-दिसंबर में प्रदूषण चरम पर होता है। गरीब छात्रों की कठिनाइयों को देखते हुए CAQM को स्कूल दोबारा खोलने का फैसला लेने की छूट दी, लेकिन सख्ती बरतने को कहा। निर्माण कार्यों में मजदूरों को मुआवजा न देने पर भी नाराजगी जताई।

दिल्ली में AQI 344 तक पहुंचा, जबकि कई स्टेशनों पर ‘सीवियर’ कैटेगरी। CAQM ने स्टेज-1 और 2 के उपायों को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया, लेकिन कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर AQI और बिगड़ा तो GRAP-4 जारी रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत करेगा, लेकिन लंबे समय के उपाय जैसे वाहन उत्सर्जन कटौती और फसल अवशेष जलाने पर रोक जरूरी। विपक्ष ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की, जबकि एनजीओ ने कोर्ट से ‘डीम्ड सिटिजनशिप’ जैसी अवधारणा अपनाने की अपील की। क्या यह सख्ती हवा को साफ कर पाएगी? अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।

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