संसद में ड्रामा Vs ड्रामा: PM मोदी के ‘डिलीवरी’ वाले तंज पर अखिलेश-डिंपल का जोरदार पलटवार, SIR पर सवालों की बौछार!
संसद में ड्रामा Vs ड्रामा: PM मोदी के ‘डिलीवरी’ वाले तंज पर अखिलेश-डिंपल का जोरदार पलटवार, SIR पर सवालों की बौछार!
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही हंगामा चरम पर पहुंच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ड्रामा नहीं, डिलीवरी’ वाले बयान ने विपक्ष को उकसा दिया। लोकसभा में नारेबाजी, वॉकआउट और स्थगन के बीच समाजवादी पार्टी के दिग्गज अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने PM पर तीखा प्रहार किया। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) पर बहस की मांग करते हुए उन्होंने BLOs की मौतों को जोड़ दिया – “क्या ये मौतें भी ड्रामा हैं?” पहला दिन ही लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित हो गई, जबकि राज्यसभा में भी हंगामा जारी रहा।
सत्र शुरू होने से पहले PM मोदी ने संसद भवन में मीडिया से कहा, “जो ड्रामा करना चाहता है, कर सकता है। यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। नारों पर नहीं, पॉलिसी पर जोर हो।” उन्होंने बिहार चुनावों में NDA की जीत का जिक्र करते हुए विपक्ष की ‘हार की भड़ास’ पर तंज कसा। “विपक्ष को चुनावी हार से उबरना चाहिए। संसद राष्ट्र निर्माण का मंच है, न कि नेगेटिविटी का।” PM ने लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि बिहार में 70% वोटिंग इसका प्रमाण है। लेकिन विपक्ष ने इसे ‘संसद को कुचलने की साजिश’ बताया।
अखिलेश यादव ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पलटवार किया। “ड्रामा कौन करता है, सब जानते हैं। SIR को ईमानदारी से करो। क्या BLO की मौतें भी ड्रामा हैं?” उन्होंने SIR को ‘वोट काटने का हथियार’ करार दिया। “लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब वोट का हक न छीना जाए। SIR से वोट कटेगा तो सपने कैसे पूरे होंगे? शादियों के सीजन में टारगेट पूरा न करने पर BLOs की जान जा रही है।” अखिलेश ने आरोप लगाया कि SIR का मकसद वोट बढ़ाना नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों और गरीबों के वोट काटना है। उन्होंने कहा, “सरकार डिलीवरी की बात करे, लेकिन पहले प्रदूषण, बेरोजगारी और महंगाई पर डिलीवर करे।”
डिंपल यादव ने लोकसभा में और बाहर तीखे बयान दिए। “पूरी विपक्ष SIR पर बहस और डेडलाइन बढ़ाने की मांग कर रही है। BLOs की मौतों का जिम्मेदार कौन? लोकतंत्र को तानाशाही में बदलना बंद करें।” उन्होंने PM के बयान को ‘विपक्ष को चुप कराने की कोशिश’ बताया। “संसद ड्रामा का मंच नहीं, लेकिन जनता के मुद्दों पर चर्चा जरूरी। SIR से लाखों वोटर प्रभावित हो रहे हैं।” डिंपल ने महिलाओं और युवाओं के वोटर लिस्ट से नाम कटने पर सवाल उठाए।
यह विवाद SIR के व्यापक विरोध से जुड़ा है। विपक्ष का दावा है कि ECI का यह अभियान ‘डी फैक्टो NRC’ है, जो गैर-BJP वोटरों को निशाना बना रहा है। राहुल गांधी ने भी कहा, “SIR पर बहस हो, वरना सत्र बेकार।” सरकार ने 15 विधेयकों पर फोकस करने की बात कही, लेकिन विपक्ष SIR हटाने या बहस की मांग पर अड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सत्र SIR और बिहार चुनावों के बाद की राजनीति तय करेगा। क्या PM की अपील कामयाब होगी, या हंगामा जारी रहेगा? सियासी घमासान तेज हो गया है!
