डिटेंशन सेंटर पर अखिलेश का करारा तंज: 2027 में जनता योगी सरकार को ही ‘डिटेंशन’ में भेज देगी!
उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें उनके मूल देश भेजने से पहले अस्थायी डिटेंशन सेंटरों में रखा जाए। इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे वोटबैंक की राजनीति करार दिया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “सरकार डिटेंशन सेंटर इसलिए बना रही है क्योंकि 2027 के बाद लोग उन्हें ही डिटेंशन में भेज देंगे।” यह बयान यूपी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान को और भड़का रहा है।
मुख्यमंत्री योगी ने 22 नवंबर को जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि प्रत्येक जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएं, जहां विदेशी नागरिकता वाले अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें उनके देश निर्वासित कर दिया जाएगा। योगी सरकार का दावा है कि यह कदम सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। राज्य में पहले से ही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान चल रहा है, जिसमें वोटर लिस्ट की जांच के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है। गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों से घुसपैठ के मामले बढ़े हैं, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय में कार्रवाई हो रही है।
अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “घुसपैठ रोकना केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा इसे वोटबैंक के लिए इस्तेमाल कर रही है। यूपी के लोग SIR प्रक्रिया में परेशान हो रहे हैं, BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) दबाव डाल रहे हैं। सरकार को डिटेंशन सेंटर बनाने की जल्दी इसलिए है क्योंकि 2027 में जनता उन्हें ही सत्ता से बाहर कर ‘डिटेंशन’ में डाल देगी।” सपा ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) प्रहरी अभियान तेज कर दिया है, जिसमें वोटर लिस्ट में कटौती का आरोप लगाया जा रहा है। अखिलेश ने मांग की कि SIR प्रक्रिया को तीन महीने बढ़ाया जाए।
यह विवाद अक्टूबर में भी भड़का था, जब अखिलेश ने योगी को ‘उत्तराखंड का घुसपैठिया’ बताते हुए कहा था कि उन्हें वापस भेज देना चाहिए। उस समय अखिलेश ने योगी के वैचारिक घुसपैठ पर भी तंज कसा था। भाजपा ने अखिलेश के ताजा बयान को खारिज करते हुए कहा कि सपा हमेशा घुसपैठियों का वोटबैंक बनाती रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “अखिलेश जी की हार की भविष्यवाणी उनकी हताशा है। योगी सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर कायम है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा 2027 चुनावों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथियार बन सकता है। सपा कार्यकर्ता सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, जबकि भाजपा SIR को ‘क्लीन वोटर लिस्ट’ का नाम दे रही है। केंद्र सरकार ने भी यूपी को समर्थन देते हुए कहा कि घुसपैठ पर सख्ती राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। फिलहाल, जिलों में डिटेंशन सेंटरों की लोकेशन चिह्नित की जा रही है, और पहली रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी गई है। अखिलेश का तंज साफ बता रहा है – 2027 की जंग अभी से शुरू हो चुकी है।
