कश्मीर टाइम्स के दफ्तर पर SIA का छापा: AK राइफल कार्ट्रिज, पिस्टल गोलियां और ग्रेनेड लीवर बरामद, अखबार ने बताया ‘चुप्पी साधने की साजिश’
कश्मीर टाइम्स के दफ्तर पर SIA का छापा: AK राइफल कार्ट्रिज, पिस्टल गोलियां और ग्रेनेड लीवर बरामद, अखबार ने बताया ‘चुप्पी साधने की साजिश’
जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने गुरुवार को कश्मीर टाइम्स के जम्मू स्थित दफ्तर पर छापेमारी की, जिसमें AK राइफल के कार्ट्रिज, पिस्टल की गोलियां और तीन ग्रेनेड लीवर बरामद हुए। यह कार्रवाई अखबार पर देश-विरोधी गतिविधियां बढ़ावा देने और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाने के आरोपों के तहत की गई। SIA ने UAPA की धारा 13 के तहत FIR दर्ज की है, जिसमें अखबार के प्रमोटरों और एक्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन का नाम शामिल है। छापे में दफ्तर के दस्तावेजों, कंप्यूटर्स और प्रेमिसेज की गहन तलाशी ली गई।
SIA के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी एक टेरर मॉड्यूल केस से जुड़ी है, जिसमें अखबार पर अलगाववादी नैरेटिव फैलाने का आरोप है। बरामद सामग्री में AK-47 के कार्ट्रिज, पिस्टल राउंड्स और ग्रेनेड के लीवर प्रमुख हैं, जो जांच एजेंसी के लिए बड़ा सुराग साबित हो सकते हैं। जम्मू के रेसिडेंसी रोड स्थित दफ्तर पर सुबह से शाम तक सर्च ऑपरेशन चला, और प्रमोटरों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। यह घटना 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच का हिस्सा बताई जा रही है, जिसमें कश्मीरी डॉक्टरों का नाम सामने आया था।
1954 में स्थापित कश्मीर टाइम्स, जो जम्मू-कश्मीर का एक प्रमुख अखबार है, ने छापे पर तीखा बयान जारी किया। एडिटर्स प्रबोध जामवाल और अनुराधा भसीन ने सोशल मीडिया पर कहा, “जम्मू दफ्तर पर SIA का छापा राज्य-विरोधी गतिविधियों के झूठे आरोपों पर आधारित है। यह समन्वित कार्रवाई है, जो हमें चुप्पी साधने के लिए डराने-धमकाने का प्रयास है। हमारी आलोचना को राज्य-विरोधी बताकर पत्रकारिता को दबाया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “हम डरेंगे नहीं, पत्रकारिता अपराध नहीं है। सच्चाई के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर छापा नहीं मार सकते।” अखबार की प्रिंट एडिशन 2021-22 से बंद है, और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही काम चल रहा है। अनुराधा भसीन, जो आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए जानी जाती हैं, ने इसे ‘प्रेस पर दबाव’ बताया।
जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम सुरिंदर सिंह चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “छापा तभी होना चाहिए जब गलती साबित हो। दबाव बनाने के लिए मीडिया पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। प्रेस चौथा खंभा है, इसे जगह मिलनी चाहिए।” विपक्षी नेता ओमार अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, “कश्मीर टाइम्स जैसे स्वतंत्र अखबार को निशाना बनाना लोकतंत्र पर हमला है।” वहीं, भाजपा ने कहा कि जांच कानूनी है और सबूतों पर कार्रवाई होगी।
यह घटना कश्मीर में प्रेस फ्रीडम पर सवाल खड़े कर रही है। 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 151वें स्थान पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह छापा आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद मीडिया पर बढ़ते दबाव का हिस्सा है। अखबार ने कहा, “हम चुप नहीं होंगे।” क्या SIA की जांच से नया खुलासा होगा? नजरें अगले कदम पर टिकी हैं।
