राजनीति

ममता बनर्जी का CEC को पत्र: ‘असफल, अव्यवस्थित और खतरनाक’ SIR को रोकें, BLOs पर दबाव से 28 मौतें – बंगाल में मतदाता सूची विवाद तेज

ममता बनर्जी का CEC को पत्र: ‘असफल, अव्यवस्थित और खतरनाक’ SIR को रोकें, BLOs पर दबाव से 28 मौतें – बंगाल में मतदाता सूची विवाद तेज

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बिहार के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुई इस प्रक्रिया पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा विरोध जताया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR को तत्काल रोकने की मांग की है। बनर्जी ने इसे “असफल, अव्यवस्थित और खतरनाक” बताया, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर दबाव के कारण 28 BLOs की मौत हो चुकी है। पत्र में उन्होंने SIR की “वर्तमान पद्धति और समयसीमा की गहन समीक्षा” की मांग की है।

ममता बनर्जी ने पत्र में आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय BLOs को “धमकाने” में लगा है। “समर्थन देने, समय बढ़ाने या प्रणालीगत खामियों को दूर करने के बजाय, बिना कारण शो-कॉज नोटिस जारी किए जा रहे हैं। BLOs, जो पहले से ही तनावग्रस्त हैं, उन्हें कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।” उन्होंने कहा कि SIR “बुनियादी तैयारी या योजना के बिना लोगों पर थोपी जा रही है”, जिससे वास्तविक मतदाताओं का नाम हटने का खतरा है। बनर्जी ने BLOs की ट्रेनिंग की कमी, दस्तावेजों की अनिश्चितता और सर्वर फेलियर का हवाला देते हुए कहा कि 4 दिसंबर की डेडलाइन से पहले सटीक डेटा अपलोड असंभव है।

यह पत्र एक BLO की मौत के एक दिन बाद आया है। जलपाईगुड़ी में अंगनवाड़ी कार्यकर्ता शांति मुनी एकका ने SIR के तनाव से सुसाइड कर लिया। उनके पति ने FIR दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि एकका ने ड्यूटी से राहत की मांग की थी, लेकिन इंकार कर दिया गया। बनर्जी ने पत्र में 28 BLOs की मौतों का जिक्र किया, जो SIR शुरू होने के बाद हुईं। TMC ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को खारिज कर दिया। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता BLOs को राज्य कर्मचारी बताकर EC में हस्तक्षेप कर रही हैं। यह राजनीतिक मकसद से मतदाता सूची प्रभावित करने की कोशिश है।”

SIR प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई, जो 51 करोड़ मतदाताओं को कवर करती है। चुनाव आयोग (ECI) ने इसे 20 साल बाद राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा बताया, जिसमें मृत, डुप्लिकेट और अनट्रेस्ड नाम हटाए जा रहे हैं। बिहार में पहले चरण में 68 लाख नाम डिलीट हुए। ECI ने कहा कि नाम हटने पर अपील का मौका मिलेगा – 8 जनवरी तक अपील, 31 जनवरी तक सुनवाई, और 7 फरवरी को अंतिम सूची। लेकिन TMC ने इसे “NRC का बैकडोर” करार दिया। ममता ने 4 नवंबर को कोलकाता में रैली में कहा, “एक भी वैध मतदाता का नाम हटा तो मोदी सरकार गिरेगी। 2024 लोकसभा चुनाव इसी सूची से जीते, अब दोष क्यों?” उन्होंने CEC को “कुर्सी बाबू” कहकर निशाना बनाया।

भाजपा ने पलटवार किया। सुवेंदु अधिकारी ने CEC को पत्र लिखकर ममता के बयानों को “हस्तक्षेप” बताया। उन्होंने कहा, “BLOs को कोई नाम न हटाने का निर्देश देना EC की स्वतंत्रता पर हमला है।” ECI ने असम को छोड़कर 12 राज्यों/UTs में SIR शुरू किया, जहां तमिलनाडु, केरल, बंगाल और पुदुच्चेरी 2026 चुनावों के लिए तैयार हो रहे हैं। DMK ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि SIR पारदर्शिता लाएगा, लेकिन TMC का विरोध राजनीतिक है। क्या ECI प्रक्रिया रोकेगा? बनर्जी की अपील पर नजरें टिकी हैं। बंगाल की सियासत में यह विवाद 2026 विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है।

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