फलों के जूस पर ORS का लेबल: FSSAI का सख्त आदेश, सभी राज्यों को निर्देश – तुरंत बिक्री बंद करें
फलों के जूस पर ORS का लेबल: FSSAI का सख्त आदेश, सभी राज्यों को निर्देश – तुरंत बिक्री बंद करें
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने फलों के जूस, एनर्जी ड्रिंक्स और रेडी-टू-ड्रिंक बेवरेजेस पर ‘ORS’ (Oral Rehydration Solution) के नाम का दुरुपयोग रोकने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किया है। 19 नवंबर को जारी इस नवीनतम आदेश में FSSAI ने कहा कि WHO की सिफारिशों के बिना ORS का लेबल लगाकर बेचे जा रहे उत्पादों की बिक्री तुरंत बंद हो। यह कदम उपभोक्ताओं को गुमराह करने और स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए उठाया गया है।
FSSAI के अधिकारिक डॉ. सत्येन कुमार पांडा ने आदेश में स्पष्ट किया कि फ्रूट-बेस्ड, नॉन-कार्बोनेटेड या अन्य बेवरेजेस पर ORS का इस्तेमाल ‘झूठा, भ्रामक और गुमराह करने वाला’ है, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 23 और 24 का उल्लंघन करता है। राज्य फूड सेफ्टी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रिटेल शॉप्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ऐसे उत्पाद हटवाएं। असली ORS (जो दवा के रूप में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत आता है) पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन कुछ अधिकारियों द्वारा गलती से इनकी जब्ती पर रोक लगाई गई है।
यह आदेश अक्टूबर 2025 के आदेशों (14-15 अक्टूबर) का फॉलो-अप है, जब FSSAI ने ORS के नाम पर बिकने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। पहले 2022 और 2024 में डिस्क्लेमर के साथ अनुमति दी गई थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह वापस ले लिया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर को एक याचिका खारिज करते हुए FSSAI के फैसले को ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक’ बताया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे उत्पाद डिहाइड्रेशन के मरीजों, खासकर बच्चों के लिए खतरनाक हैं, क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा WHO फॉर्मूले से 10 गुना ज्यादा हो सकती है।
इस मुहिम की शुरुआत हैदराबाद की पीडियाट्रिशियन डॉ. सिवरंजनी संतोष ने की, जिन्होंने 2017 से ‘ORS मिसलीडिंग’ के खिलाफ अभियान चलाया। 2022 में तेलंगाना हाईकोर्ट में PIL दायर करने के बाद FSSAI ने कार्रवाई शुरू की। डॉ. संतोष ने इंस्टाग्राम पर खुशी के आंसू बहाते हुए कहा, “हम जीत गए। अब कोई भ्रामक ORS नहीं बिकेगा।” डॉक्टरों का कहना है कि गलत ORS से डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है, क्योंकि ग्लूकोज-सोडियम बैलेंस बिगड़ जाता है।
FSSAI के अनुसार, कई ब्रांड्स जैसे ‘ORS फ्रूट जूस’ या ‘ORS एनर्जी ड्रिंक’ बेच रहे थे, जो मेडिकल ORS (नमक, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स का सटीक मिश्रण) से बिल्कुल अलग हैं। अब फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को लेबल, पैकेजिंग और विज्ञापनों से ORS हटाना होगा। उल्लंघन पर जुर्माना या जेल हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डायबिटीज और बच्चों की सेहत के लिए बड़ा राहत है। क्या कंपनियां जल्द रीब्रैंडिंग करेंगी? बाजार पर नजरें टिकी हैं।
