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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा शुरू: हादसों में घायलों को एयरलिफ्ट, 5 मिनट में अस्पताल पहुंचाने का दावा

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा शुरू: हादसों में घायलों को एयरलिफ्ट, 5 मिनट में अस्पताल पहुंचाने का दावा

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर आज से हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा शुरू हो गई है, जो हादसों में घायलों को तुरंत एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा का उद्घाटन किया। यह 1,386 किलोमीटर लंबे दुनिया के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है, जहां 2025 में अब तक 500 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। सेवा के तहत 24×7 हेलिपैड्स पर तैनात हेलीकॉप्टर घायलों को 5 मिनट के अंदर निकटतम मेडिकल सेंटर पहुंचाएंगे।

गडकरी ने कहा, “एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। यह सेवा ‘जीरो टॉलरेंस’ के तहत लाई गई है, जो जान बचाने में क्रांतिकारी साबित होगी।” सेवा NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और Pawan Hans Helicopters के सहयोग से चलेगी। एक्सप्रेसवे पर 10 प्रमुख हेलिपैड्स (दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, धुले, नासिक, ठाणे, मुंबई) बनाए गए हैं, जहां हेलीकॉप्टर हमेशा रेडी रहेंगे। घायल को लिफ्ट करने के लिए टोल-फ्री नंबर 1033 पर कॉल करें – GPS लोकेशन शेयर करने पर 10 मिनट में हेलीकॉप्टर पहुंचेगा।

यह पहल हाल के हादसों से प्रेरित है। 14 नवंबर को रतलाम के पास XUV700 कार दुर्घटना में 5 लोग (घुलाम रसूल-70, खालिस चौधरी, अब्दुल घुलाम, दानिश-15, दुर्गेश प्रसाद-35) मारे गए। CCTV फुटेज में कार मही नदी के पास खाई में गिरी दिखी। इसी तरह, 2 अक्टूबर को पुणे हेलीकॉप्टर क्रैश में 3 पूर्व IAF/Navy अधिकारी शहीद हुए। एक्सप्रेसवे पर 2025 में 1,200 किमी हिस्सा चालू होने के बाद हादसे 20% बढ़े, लेकिन यह सेवा उन्हें 40% कम करने का लक्ष्य रखती है। हेलीकॉप्टर में वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर और डॉक्टर टीम होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि एयर एम्बुलेंस ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान है। NHAI के अनुसार, अगले साल पूरे 8-लेन वाले एक्सप्रेसवे पर 20 और हेलिपैड्स बनेंगे। गडकरी ने चेतावनी दी, “स्पीड लिमिट का पालन करें, वरना सख्त चालान।” क्या यह सेवा ‘सेफ हाईवे’ का नया अध्याय लिखेगी? ड्राइवर्स की नजरें अब हेलीकॉप्टरों पर टिकी हैं।

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