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यूक्रेन बॉर्डर पर अमेरिकी टोमाहॉक की तैनाती: रूसी हाइपरसोनिक हथियारों से महायुद्ध का साया गहराया

यूक्रेन बॉर्डर पर अमेरिकी टोमाहॉक की तैनाती: रूसी हाइपरसोनिक हथियारों से महायुद्ध का साया गहराया

यूक्रेन युद्ध के तीन साल पूरे होने के साथ ही पूर्वी यूरोप में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने यूक्रेन को लंबी दूरी की टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें सौंप दी हैं, जो रूसी बॉर्डर के करीब तैनात हो रही हैं। यह कदम रूस के लिए सीधी चुनौती है, जहां मॉस्को ने जवाब में हाइपरसोनिक ‘ओरेश्निक’ मिसाइलों की तैनाती की धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एस्केलेशन तीसरे विश्व युद्ध की ओर इशारा कर रहा है, क्योंकि दोनों महाशक्तियां अब परमाणु दहलीज पर खड़ी हैं।

पेंटागन ने गुरुवार को घोषणा की कि यूक्रेन को 100 से अधिक टोमाहॉक मिसाइलें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो HIMARS लॉन्चर से दागी जा सकती हैं। इनकी रेंज 2,500 किलोमीटर है, जो रूस के आंतरिक इलाकों – मॉस्को तक – को निशाना बना सकती हैं। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा, “यह यूक्रेन की रक्षा के लिए जरूरी कदम है, ताकि रूसी आक्रमण को रोका जा सके।” लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे “युद्ध की घोषणा” करार दिया। क्रेमलिन ने चेतावनी जारी की कि अगर ये मिसाइलें रूसी धरती पर इस्तेमाल हुईं, तो “ओरेश्निक” जैसे हाइपरसोनिक हथियार यूरोपीय राजधानियों पर गिरेंगे।

ओरेश्निक, जो नवंबर 2024 में यूक्रेन के ड्नीप्रो पर पहली बार दागा गया था, मच 10-11 की रफ्तार से उड़ता है। यह मल्टीपल इंडिपेंडेंट री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) से लैस है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकता है। रूस ने दावा किया कि यह पश्चिमी एयर डिफेंस सिस्टम्स जैसे पैट्रियट को चकमा दे सकता है। हाल के दिनों में रूस ने बेलारूस में इनकी तैनाती शुरू की है, जो यूक्रेन बॉर्डर से महज 100 किलोमीटर दूर है। पुतिन ने अगस्त 2025 में बेलारूस के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रूसी न्यूक्लियर छत्र की बात कही गई।

यह टकराव यूक्रेन युद्ध के नए चरण को जन्म दे रहा है। रूस ने नवंबर 2024 में यूक्रेन के ATACMS और ब्रिटिश स्टॉर्म शैडो हमलों के जवाब में ओरेश्निक का इस्तेमाल किया था। अब अमेरिकी टोमाहॉक से रूसी सैन्य अड्डे, तेल रिफाइनरी और कमांड सेंटर्स खतरे में हैं। यूक्रेनी सेना ने कहा कि ये मिसाइलें रूसी सप्लाई लाइनों को काट देंगी, लेकिन रूसी जनरल वेलरी गेरासिमोव ने अमेरिकी चीफ जनरल सीक्यू ब्राउन को फोन पर चेताया कि “मिसकैलकुलेशन से वैश्विक तबाही हो सकती है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरसोनिक हथियारों की होड़ अमेरिका-रूस-चीन के बीच असंतुलन पैदा कर रही है। अमेरिका का ARRW (एयर-लॉन्च्ड रैपिड रिस्पॉन्स वेपन) अभी टेस्टिंग में है, जबकि रूस ने 2025 में 2,500 हाई-प्रिसिजन मिसाइलें बनाने का लक्ष्य रखा है। चाइना भी DF-17 जैसे हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहा है। यूरोपीय संघ ने चिंता जताई कि बेलारूस में तैनाती पोलैंड और रोमानिया को खतरा है। NATO ने आपात बैठक बुलाई, लेकिन ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने से अमेरिकी नीति अनिश्चित है।

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। रूसी सांसद एलेक्सी जुरावलेव ने कहा, “हम वेनेजुएला को भी ओरेश्निक दे सकते हैं, अगर अमेरिका ने यूक्रेन को टोमाहॉक दिए।” X पर यूजर्स इसे “प्रॉक्सी वॉर” बता रहे हैं, जो क्यूबा मिसाइल क्राइसिस की याद दिलाता है। फिलहाल, दोनों पक्ष डी-एस्केलेशन की बात कर रहे हैं, लेकिन बॉर्डर पर मिसाइलें तैनात होने से महायुद्ध का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है, वरना पूर्वी यूरोप का संकट वैश्विक आग बन सकता है।

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