गाजा नरसंहार के आरोप में तुर्की का इजरायल पर तीखा प्रहार: नेतन्याहू समेत 37 अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
गाजा नरसंहार के आरोप में तुर्की का इजरायल पर तीखा प्रहार: नेतन्याहू समेत 37 अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
मध्य पूर्व के तनावपूर्ण दौर में तुर्की ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत 37 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गाजा में ‘नरसंहार’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं। इस्तांबुल के मुख्य लोक अभियोजक कार्यालय ने शुक्रवार को यह घोषणा की, जो इजरायल-हमास युद्ध के एक साल बाद आई है। यह कदम तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यिप एर्दोआन की फिलिस्तीन समर्थक नीति का सबसे कड़ा उदाहरण है, जिसने वैश्विक कूटनीति में नई लकीर खींच दी है।
अभियोजक कार्यालय के बयान के अनुसार, वारंट इजरायली सेना की गाजा अभियान के दौरान ‘व्यवस्थित नरसंहार’ पर आधारित हैं। इसमें नेतन्याहू के अलावा रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन गवीर, सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जामिर और नौसेना कमांडर डेविड सलामा जैसे नाम शामिल हैं। तुर्की ने आरोप लगाया कि इजरायल ने गाजा में जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया, जिसमें तुर्की द्वारा निर्मित ‘तुर्की-फिलिस्तीनी मित्रता अस्पताल’ का मार्च 2025 में बमबारी से विनाश भी शामिल है। यह अस्पताल फिलिस्तीनियों को चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहा था। अभियोजक ने कहा, “ये अपराध मानवता के खिलाफ हैं और तुर्की कानून के तहत जांच जारी रहेगी।”
यह फैसला अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के पिछले साल के वारंट से प्रेरित लगता है, जहां ICC ने नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया था। तुर्की ने दक्षिण अफ्रीका के ICJ मामले में इजरायल के खिलाफ समर्थन भी दिया था। एर्दोआन सरकार का यह कदम गाजा में हालिया युद्धविराम के बाद आया है, जहां इजरायली हमलों में 40,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार। तुर्की ने इजरायल पर गाजा पुनर्निर्माण में सहायता देने से इनकार करने का भी आरोप लगाया है।
इजरायल की प्रतिक्रिया तीखी थी। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे “एर्दोआन का प्रचार स्टंट” करार दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “एर्दोआन के तुर्की में न्यायपालिका राजनीतिक विरोधियों को दबाने का हथियार बन चुकी है, जैसे हाल में इस्तांबुल मेयर एकरेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी।” पूर्व विदेश मंत्री अवीगदोर लिबरमैन ने कहा कि यह वारंट साबित करता है कि तुर्की को गाजा में कोई भूमिका नहीं मिलनी चाहिए। इजरायली अधिकारियों ने तुर्की के दावों को “झूठा प्रचार” बताते हुए खारिज कर दिया।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं। हमास ने इसे “न्यायपूर्ण कदम” कहा, जबकि अमेरिका ने चुप्पी साधी है। यूरोपीय संघ ने तुर्की से संयम बरतने की अपील की, लेकिन फिलिस्तीन समर्थक देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका ने सराहना की। एक्स पर बहस छिड़ गई है, जहां #NetanyahuArrest ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स इसे “इंसाफ की जीत” बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे “राजनीतिक बदले” का नाम दे रहे हैं।
यह घटना तुर्की-इजरायल संबंधों को और खराब कर सकती है, जो पहले से ही 2010 के गाजा फ्लोटिला हमले से तनावपूर्ण हैं। तुर्की ने व्यापार प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन गैस सौदे पर बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ICC को मजबूत कर सकता है, लेकिन व्यावहारिक गिरफ्तारी मुश्किल है। एर्दोआन की लोकप्रियता घरेलू स्तर पर बढ़ेगी, लेकिन पश्चिमी सहयोगियों से दूरी बढ़ सकती है। गाजा संकट के बीच यह वारंट अंतरराष्ट्रीय न्याय की नई बहस छेड़ रहा है – क्या राजनीतिक दबाव न्याय को प्रभावित करेगा? फिलहाल, नेतन्याहू तुर्की यात्रा से वंचित हैं, और मध्य पूर्व की आग में नया ईंधन डाल दिया गया है।
