महाराष्ट्र में ‘वोट चोरी’ का आरोप: MVA का ‘सत्याचा मोर्चा’ मुंबई में, राज ठाकरे बोले—फर्जी वोटर दिखते ही करो इलाज!
महाराष्ट्र में ‘वोट चोरी’ का आरोप: MVA का ‘सत्याचा मोर्चा’ मुंबई में, राज ठाकरे बोले—फर्जी वोटर दिखते ही करो इलाज!
महा विकास अघाड़ी (MVA)—कांग्रेस, शिवसेना (UBT), NCP (SP)—के गठबंधन ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ मिलकर मुंबई में ‘सत्याचा मोर्चा’ (रैली ऑफ ट्रुथ) निकाला, जो मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ था। मार्च चर्चगेट के फैशन स्ट्रीट से शुरू होकर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास BMC मुख्यालय पर समाप्त हुआ। MVA ने निर्वाचन आयोग (ECI) से मांग की कि लोकल बॉडी चुनाव (2026 तक) स्थगित कर फर्जी वोटरों को हटाया जाए। MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा, “फर्जी वोटर दिखते ही करो इलाज! मतदाता सूची साफ न होने तक कोई चुनाव नहीं।” यह मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन हजारों समर्थकों ने BJP पर ‘डेमोक्रेसी मैच-फिक्सिंग’ का आरोप लगाया।
मार्च की झलक: एकजुट विपक्ष का प्रदर्शन
समय और रूट: दोपहर 1 बजे शुरू, 4 बजे समाप्त। उधव ठाकरे, शरद पवार, संजय राउत, विजय वडेट्टीवार जैसे नेता शामिल। राज ठाकरे ने MNS कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए थे, “मोर्चा ऐसा निकालो कि गली से दिल्ली तक नजरें मुंबई पर लगें।”
मुख्य मांगें: ECI से 96 लाख फर्जी वोटरों (मुंबई में 10 लाख) को हटाने, EVM प्रोग्रामिंग जांच, और चुनाव स्थगित करने की अपील। राहुल गांधी ने दिल्ली से समर्थन दिया, “वोटर लिस्ट में गड़बड़ी लोकतंत्र पर हमला है।”
राज ठाकरे का बयान: रैली में राज ने कहा, “12 सालों से वोट चोरी हो रही है—EVM प्रोग्रामिंग से, न कि हैकिंग से। हमारी रैलियों में भीड़ आती है, लेकिन वोट नहीं। फर्जी वोटरों का इलाज तुरंत करो, वरना चुनाव रद्द!” उन्होंने ECI को चेतावनी दी कि वैध नाम कटे तो 1 लाख लोग दिल्ली मार्च करेंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि: 96 लाख फर्जी वोटरों का दावा
MVA-MNS का आरोप है कि BJP ने मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक जैसे शहरों में फर्जी नाम जोड़े, जो 2024 विधानसभा चुनावों में भी दिखे। 15 अक्टूबर को ECI के साथ मीटिंग में विपक्ष ने शिकायत की, लेकिन ECI ने कहा कि लिस्ट सुरक्षित है। BJP ने इसे ‘विपक्ष की हताशा’ बताया—मंत्री नितेश राणे ने तंज कसा, “लोकसभा चुनाव के बाद क्यों चुप थे?” यह विरोध 2025 BMC चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति लगता है।
यह मार्च महाराष्ट्र के लोकतंत्र को बचाने का संदेश दे रहा है।
