RSS पर बैन की मांग पर खरगे को जवाब: दत्तात्रेय होसबाले बोले—’इतिहास से सीखें, तीन बार कोशिशें नाकाम रहीं; संघ को जनता ने स्वीकारा’
RSS पर बैन की मांग पर खरगे को जवाब: दत्तात्रेय होसबाले बोले—’इतिहास से सीखें, तीन बार कोशिशें नाकाम रहीं; संघ को जनता ने स्वीकारा’
मध्य प्रदेश के जबलपुर में RSS के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के RSS पर बैन लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। खरगे ने हाल ही में NCERT किताबों से RSS, गोडसे और गुजरात दंगों से जुड़े टॉपिक्स हटाने पर तंज कसते हुए कहा था कि अगर पीएम मोदी सरदार पटेल का सम्मान करते हैं, तो RSS पर बैन लगाना चाहिए—जैसा पटेल ने कभी लगाया था। होसबाले ने जवाब में कहा, “खरगे को इतिहास से सीखना चाहिए। कांग्रेस ने RSS पर तीन बार बैन लगाने की कोशिश की, लेकिन हर बार समाज और अदालतों ने सत्य का साथ दिया। संघ राष्ट्र निर्माण में लगा है, बैन लगाने से क्या फायदा? जनता ने RSS को स्वीकारा है।”
बयान का संदर्भ: खरगे की मांग और RSS का इतिहास
खरगे का बयान: 31 अक्टूबर 2025 को ट्वीट में खरगे ने कहा, “मोदी सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़ रही है। RSS और BJP देश की कानून-व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं। अगर पटेल का सम्मान है, तो RSS पर बैन लगाओ।” उन्होंने इसे ‘व्यक्तिगत राय’ बताया, लेकिन कांग्रेस ने इसे पार्टी लाइन पर दोहराया। यह विवाद संविधान पर बहस से जुड़ा है, जहां RSS ने ‘सेकुलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द हटाने की मांग की थी।
होसबाले का पलटवार: RSS की 100वीं वर्षगांठ की बैठक में होसबाले ने कहा, “बैन के लिए कोई वजह होनी चाहिए। संघ ने कभी राष्ट्र-विरोधी काम नहीं किया। 1948 (गांधी हत्या), 1975 (इमरजेंसी) और 1992 (बाबरी) में बैन लगे, लेकिन अदालतों ने RSS को निर्दोष ठहराया। खरगे को इतिहास पढ़ना चाहिए।” उन्होंने RSS को ‘राष्ट्र प्रेम का प्रतीक’ बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस का पक्ष: प्रियंक खरगे (मल्लिकार्जुन के बेटे) ने कहा, “अगर केंद्र में कांग्रेस सत्ता में आई, तो RSS पर बैन लगाएंगे। वे संविधान बदलना चाहते हैं।” यह बयान जुलाई 2025 का है, लेकिन वर्तमान विवाद में दोहराया गया।
BJP-RSS का स्टैंड: BJP ने इसे ‘कांग्रेस की हताशा’ बताया। सरसंघचालक मोहन भागवत ने बैठक में कहा, “संघ संविधान का सम्मान करता है, लेकिन इतिहास को तोड़-मरोड़ना गलत है।”
यह विवाद 2024 लोकसभा चुनाव के बाद फिर भड़का है, जहां RSS की भूमिका पर सवाल उठे। होसबाले का बयान RSS की मजबूती का प्रतीक लगता है।
