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कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को चुनाव आयोग का नोटिस: दो वोटर आईडी कार्ड मामले में 8 सितंबर तक मांगा जवाब

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को चुनाव आयोग का नोटिस: दो वोटर आईडी कार्ड मामले में 8 सितंबर तक मांगा जवाब

राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा को दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आरोप में नोटिस जारी किया है। नई दिल्ली जिला निर्वाचन कार्यालय ने खेड़ा से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और 8 सितंबर, 2025 को सुबह 11 बजे तक जवाब जमा करने का निर्देश दिया है। यह नोटिस जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत दंडनीय अपराध के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति का एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकरण करना प्रतिबंधित है।

यह विवाद तब भड़का जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर दावा किया कि पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय वोटर आईडी कार्ड (ईपीआईसी नंबर) हैं। मालवीय ने कहा कि एक कार्ड जंगपुरा विधानसभा (पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र) से जुड़ा है, जहां ईपीआईसी नंबर XHC1992338 है, जबकि दूसरा नई दिल्ली विधानसभा (नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र) से संबंधित है, जिसका ईपीआईसी नंबर SJE0755967 है। दोनों कार्डों में नाम ‘पवन खेड़ा’ और पिता का नाम ‘एचएल खेड़ा’ एक ही है। मालवीय ने इसे ‘वोट चोरी’ का उदाहरण बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे खेड़ा के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

बीजेपी ने इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाते हुए कहा कि कांग्रेस बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ अभियान चला रही है, लेकिन खुद के नेता पर दोहरी वोटर आईडी का आरोप है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस पर ‘चुनावी धांधली का इतिहास’ होने का आरोप लगाया।

नई दिल्ली जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि खेड़ा का नाम जंगपुरा (भाग नंबर 28, निजामुद्दीन ईस्ट) और नई दिल्ली (भाग नंबर 78, काका नगर) दोनों विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में दर्ज है। नोटिस में कहा गया, “एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची में नाम दर्ज होना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत अपराध है। आपको बताएं कि आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।” आयोग ने खेड़ा को 8 सितंबर तक कार्यालय में हाजिर होकर या लिखित जवाब देकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। यदि जवाब संतोषजनक न मिला, तो कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

नोटिस मिलने के बाद पवन खेड़ा ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं 2016 में जंगपुरा क्षेत्र से शिफ्ट हो गया था और नाम हटाने के लिए 4-5 बार आवेदन किया, लेकिन मतदाता सूची में संशोधन के दौरान यह नहीं हुआ। यह चुनाव आयोग की व्यवस्थागत विफलता है, न कि मेरा दोष।” खेड़ा ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा, “मैं जवाब दूंगा, लेकिन उम्मीद करता हूं कि आयोग अन्य मामलों में भी यही तत्परता दिखाए। वोटर लिस्ट को दुरुस्त रखना आयोग की जिम्मेदारी है, न कि कांग्रेस की।”

खेड़ा ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि अमित मालवीय और अनुराग ठाकुर जैसे नेता उन्हें निशाना बना रहे हैं, लेकिन इससे आयोग की कमियों का ही खुलासा हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “मेरा नाम अब तक सूची में क्यों है? क्या मेरे वोट का दुरुपयोग हो रहा है? मुझे सीसीटीवी फुटेज और मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट दें।” खेड़ा ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि कांग्रेस बिहार SIR में 89 लाख शिकायतें दे चुकी है, लेकिन आयोग पारदर्शिता नहीं बरत रहा।

यह मामला बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़ी आपत्तियों की समय सीमा 15 सितंबर तक बढ़ा दी है। बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाकर खुद की गड़बड़ियां छिपा रही है, जबकि कांग्रेस इसे आयोग की निष्पक्षता पर हमला बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावों में वोटर लिस्ट की शुद्धता को बड़ा मुद्दा बना सकता है।

चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन मामला गंभीर होने से आगे की जांच की संभावना है। पवन खेड़ा का जवाब आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस नोटिस का क्या परिणाम निकलता है।

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