यूपी में पैतृक संपत्ति का बंटवारा हो गया आसान, सिर्फ इतना शुल्क लगेगा; योगी कैबिनेट में फैसला
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में संयुक्त पारिवारिक संपत्ति (पैतृक संपत्ति) के विभाजन पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क को कुल 10 हजार रुपये तक सीमित करने का प्रस्ताव मंजूर हो गया। अब चार पीढ़ियों तक की किसी भी मूल्य की संयुक्त पैतृक संपत्ति का बंटवारा मात्र 5,000 रुपये स्टांप शुल्क और 5,000 रुपये पंजीकरण फीस में हो सकेगा। इस निर्णय से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पहले संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4% स्टांप शुल्क और 1% पंजीकरण शुल्क के बोझ तले दबे रहते थे।
पहले की व्यवस्था में यदि संपत्ति का मूल्य एक करोड़ रुपये था, तो स्टांप शुल्क अकेले ही करीब 4 लाख रुपये तक पहुंच जाता था, भले ही 30% छूट मिलने के बाद। इस कारण परिवार के सदस्य बंटवारे से हिचकते थे, जिससे दीवानी और राजस्व अदालतों में विवाद बढ़ते थे। स्टांप एवं पंजीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि यह नई व्यवस्था मुकदमेबाजी को कम करेगी, आपसी समझौते को बढ़ावा देगी और भूमि व राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट करने में मदद करेगी। इससे संपत्तियां बाजार में आसानी से उपलब्ध होंगी। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसी तरह की व्यवस्था से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
सरकार के बयान के अनुसार, शुरुआत में स्टांप शुल्क से 5.58 करोड़ और पंजीकरण शुल्क से 80.67 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है, लेकिन पंजीकरण की संख्या बढ़ने से यह भरपाई हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह कदम ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करेगा और पारिवारिक सौहार्द को बढ़ावा देगा। जल्द ही संबंधित शासनादेश जारी कर दिया जाएगा, जिसके बाद लोग 10 हजार रुपये के खर्च पर पक्की लिखा-पढ़ी करा सकेंगे। यह फैसला उत्तर प्रदेश के 40 लाख सालाना रजिस्ट्री मामलों को सरल बनाएगा और संपत्ति विवादों में कमी लाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कानूनी स्पष्टता बढ़ेगी और आर्थिक बोझ कम होगा। योगी सरकार का यह निर्णय परिवारों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
