नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरी ‘जेन-जी’, बुलडोजर एक्शन और युवक की मौत के बाद इस्तीफे की मांग तेज
नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरी ‘जेन-जी’, बुलडोजर एक्शन और युवक की मौत के बाद इस्तीफे की मांग तेज
नेपाल में नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ वहां की युवा पीढ़ी (जेन-जी) का गुस्सा फूट पड़ा है। इसका ताजा उदाहरण बीते दिन देश के युवाओं द्वारा किए गए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान देखने को मिला। गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर 2025 में हुए ऐतिहासिक ‘जेन-जी आंदोलन’ के तहत नेपाल के युवाओं ने केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल कर बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया था। हालांकि, बड़े-बड़े दावे करने वाली शाह सरकार की कार्यशैली से सत्ता संभालने के चार महीने से भी कम समय में लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अंदर भी अब गंभीर असंतोष देखने को मिल रहा है। इन सबके बीच नेपाल के एक 25 वर्षीय युवक गणेश नेपाली की दर्दनाक मौत ने जनता के गुस्से में घी का काम किया है।
2,600 से ज्यादा घरों पर चला बुलडोजर, 15 हजार लोग बेघर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युवाओं के इस भारी आक्रोश के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख झुग्गी बस्तियों पर हो रहा सरकारी बुलडोजर एक्शन है। इस साल अप्रैल से शुरू हुए सरकार के बेदखली अभियान के तहत काठमांडू में नदी किनारे अवैध कब्जे वाले 2,600 से ज्यादा घरों को जमींदोज कर दिया गया है।
इस सख्त कार्रवाई के कारण 15,000 से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सरकार ने बिना किसी ठोस विकल्प या पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था किए बिना उनका आसियाना छीन लिया, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं इस कड़कड़ाती धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं पर थर्ड डिग्री और ड्राइवर का आत्मदाह
इन बेघर हुए लोगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। खबरों के मुताबिक, हिरासत के दौरान पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं पर थर्ड डिग्री का भी इस्तेमाल किया, जिससे मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यह जन-आक्रोश उस समय और भयानक हो गया, जब काठमांडू पुलिस ने कथित तौर पर नो-पार्किंग नियम तोड़ने को लेकर गणेश नेपाली नाम के एक ‘राइड शेयरिंग’ बाइक ड्राइवर की मोटरसाइकिल के पहिए को लॉक (दबा) कर दिया। आजीविका के एकमात्र साधन पर पुलिसिया सख्ती से परेशान होकर इस 25 वर्षीय युवक ने बीच सड़क पर खुद को आग लगा ली (आत्मदाह कर लिया), जिससे उसकी मौत हो गई।
बेरोजगारी और आर्थिक नीतियों पर घिरी सरकार
नेपाल में बेरोजगारी हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। पिछले साल के आंदोलन में भी यह युवाओं की सबसे बड़ी चिंता थी। युवाओं का आरोप है कि वर्तमान सरकार ने अपने नए बजट और आर्थिक नीतियों में बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस योजना या खास ऐलान नहीं किया है। युवाओं के साथ-साथ अब देश के किसानों ने भी मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
जुमलेबाजी और राजनीतिक अस्थिरता का साया
जेन-जी आंदोलन के दौरान युवाओं को जो बड़े सपने दिखाए गए थे, वे अब फीके पड़ते नजर आ रहे हैं। शुरुआती दिनों में वीआईपी कल्चर को खत्म करने को लेकर शाह सरकार के फैसलों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि देश चलाना, लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना सिर्फ चुनावी जुमलेबाजी से कहीं ऊपर की बात है।
नेपाल के राजनीतिक इतिहास को देखते हुए जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में यदि बालेंद्र शाह को भी इस्तीफा देना पड़े, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। नेपाल की राजनीति लंबे समय से बेहद अस्थिर रही है और बीते कई सालों में वहां कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है।
