Sunday, July 19, 2026
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आरबीआई की नई तैयारी: भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट, जानें इसके फायदे और पूरी योजना

आरबीआई की नई तैयारी: भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट, जानें इसके फायदे और पूरी योजना

​रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश के करेंसी सिस्टम में एक बड़ा और आधुनिक बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। सेंट्रल बैंक की नई पीढ़ी की करेंसी लाने के प्लान के तहत जल्द ही प्लास्टिक बैंकनोट्स (पॉलिमर करेंसी) का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही आम जनता के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आइए, इन सभी जरूरी सवालों के सिलसिलेवार जवाब जानते हैं।

​प्लास्टिक बैंकनोट क्या होते हैं?

​पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट पारंपरिक कॉटन-बेस्ड पेपर (कागज) के बजाय एक विशेष, पतले और लचीले प्लास्टिक मटीरियल पर छापे जाते हैं।

​दिखने और छूने में कैसे होंगे?: ‘प्लास्टिक’ कहे जाने के बावजूद ये नोट क्रेडिट या डेबिट कार्ड जितने कड़े नहीं होते।

​इस्तेमाल में आसानी: ये बेहद हल्के और आसानी से मुड़ने वाले होते हैं, जिन्हें आम कागजी नोटों की तरह ही बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकता है।

​क्या मौजूदा पेपर करेंसी पूरी तरह बंद हो जाएगी?

​नहीं, कागजी मुद्रा पूरी तरह बंद नहीं होगी। प्लास्टिक नोट आने के बाद भी पॉलीमर और कागजी नोट दोनों बाजार में साथ-साथ चलते रहेंगे।

​चरणबद्ध शुरुआत: आरबीआई नए नोटों को चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से लाएगा।

​छोटे नोटों से ट्रायल: पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत ₹10 और ₹20 के छोटे नोटों से होगी, क्योंकि ये नोट आम जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं।

​बड़ा बदलाव कब?: सूत्रों के अनुसार, इस ट्रायल के नतीजों के आधार पर आरबीआई साल 2027 से इसे बड़े पैमाने पर पूरे देश में लागू कर सकता है।

​RBI प्लास्टिक नोट क्यों ला रहा है और इसके क्या फायदे हैं?

​आरबीआई द्वारा यह कदम उठाने के पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

​ज्यादा टिकाऊपन: प्लास्टिक नोट नमी, गंदगी, पानी और सामान्य टूट-फूट से सुरक्षित रहते हैं। कागजी नोटों की तुलना में इनकी उम्र काफी लंबी होती है।

​लागत में कमी: वर्तमान में खराब नोटों को बदलने और नए नोट छापने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में नोट छपाई का खर्च बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, और करीब 23.8 अरब खराब नोटों को सर्कुलेशन से हटाना पड़ा। प्लास्टिक नोट आने से बार-बार नोट छापने का यह भारी खर्च कम होगा।

​बेहतर सुरक्षा (Anti-Counterfeiting): इन नोटों में एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट (जाली करेंसी) तैयार करना लगभग असंभव हो जाएगा।

​कैश की भारी मांग: ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद देश में फिजिकल कैश की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। 15 मई तक सर्कुलेशन में मौजूद नोटों की कुल वैल्यू 42.86 ट्रिलियन रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी।

​किन देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं प्लास्टिक नोट?

​दुनिया भर के 60 से ज्यादा देशों ने पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलीमर नोटों को अपना लिया है:

​पहल करने वाला देश: साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया पॉलीमर नोट (10 डॉलर) जारी करने वाला दुनिया का पहला देश बना था।

​पूरी तरह अपनाने वाले देश: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रोमानिया (1998 में पहला यूरोपीय देश), वियतनाम, ब्रूनेई, यूनाइटेड किंगडम और बारबाडोस जैसे देशों की पूरी करेंसी अब प्लास्टिक नोटों में ही है। साल 2026 में ओमान भी 1-रियाल का पॉलीमर नोट जारी कर इस समूह में शामिल हो चुका है।

​आंशिक (Partial) रूप से अपनाने वाले देश: सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों ने कुछ खास मूल्यवर्ग (Denominations) के लिए प्लास्टिक नोट जारी किए हैं, जबकि बाकी के लिए कागजी नोटों का उपयोग जारी रखा है।

​भारत में प्लास्टिक नोटों का इतिहास

​भारत में पॉलीमर करेंसी लाने की चर्चा करीब दो दशकों से चल रही है:

​2007: आरबीआई ने पहली बार इसका प्रस्ताव रखा और जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहरों में ट्रायल की योजना बनाई।

​2012: तत्कालीन यूपीए सरकार ने इन 5 शहरों में 10 रुपये के एक अरब प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी थी।

​2016: सरकार ने संसद को सूचित किया कि पॉलीमर नोटों को हासिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह कभी धरातल पर नहीं आ पाया।

​वर्तमान स्थिति: हाल ही में जून 2026 को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक नोट लाने पर विचार जरूर किया जा रहा है, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है और इस पर कोई अंतिम फैसला होना बाकी है।

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