अभिषेक बनर्जी की बागी नेताओं को खुली चुनौती: ‘विपक्ष में गए नेता टीएमसी में लौटें, 1 घंटे में दे दूंगा इस्तीफा’
अभिषेक बनर्जी की बागी नेताओं को खुली चुनौती: ‘विपक्ष में गए नेता टीएमसी में लौटें, 1 घंटे में दे दूंगा इस्तीफा’
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे घमासान और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी टूट के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का एक बेहद आक्रामक और बड़ा बयान सामने आया है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के उन बागी नेताओं को खुली चुनौती दी है जो टीएमसी छोड़कर जा चुके हैं। उन्होंने एलान किया कि अगर उनके विरोध में पार्टी छोड़ने वाले सभी नेता वापस टीएमसी में लौट आते हैं, तो वे महज एक घंटे के भीतर अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा दे देंगे।
अभिषेक बनर्जी ने बिना किसी बागी विधायक या सांसद का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने टीएमसी का साथ उस कठिन समय में छोड़ा जब पार्टी के सामने मुश्किलें थीं और उन पर कई तरह के बाहरी दबाव बनाए जा रहे थे।
जांच एजेंसियों के डर और बीजेपी से समझौते का लगाया आरोप
अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे आरोप लगाए:
एजेंसियों का दबाव: उन्होंने दावा किया कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए, उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा उकसाया व डराया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने घुटने टेक दिए।
राहत का सौदा: अभिषेक ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने केंद्रीय एजेंसियों (ED और CBI) की कार्रवाई से बचने और राहत पाने के लिए बीजेपी के साथ गुप्त समझौता किया था।
छवि खराब करने की साजिश: उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पार्टी छोड़ने, अलग गुट बनाने या बीजेपी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बदले में उनसे टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी करने और उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए कहा गया था।
कार्यकर्ताओं की तारीफ: अभिषेक बनर्जी ने कहा कि नेताओं के जाने के बावजूद टीएमसी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने सबसे कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी का झंडा थामे रखा, मजबूती से संघर्ष किया और जनता के भरोसे को टूटने नहीं दिया।
टीएमसी में बढ़ता असंतोष: कई बड़े नेताओं ने बनाई दूरी
दूसरी तरफ, टीएमसी से अलग हुए नेताओं का तर्क बिल्कुल विपरीत है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का आरोप है कि इस मौजूदा राजनीतिक संकट की सबसे बड़ी वजह संगठन के भीतर लगातार बढ़ रहा असंतोष और शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर गहरे मतभेद हैं। इस उथल-पुथल के बीच सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक जैसे कई अन्य वरिष्ठ और बड़े नेताओं ने भी फिलहाल पार्टी के मुख्य संगठन से दूरी बना ली है, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं।
20 सांसदों के बागी गुट ने थामी NCPI की राह, मिला सरकारी निमंत्रण
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद में टीएमसी को बड़ा झटका लग चुका है। डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाया है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का दावा किया है।
इस बागी गुट में पश्चिम बंगाल के कई नामचीन चेहरे और सांसद शामिल हैं:
काकोली घोष दस्तिदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, देव अधिकारी, जून मालिया, रचना बनर्जी, प्रसून बनर्जी, माला रॉय, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, बापी हलदार, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, असित मल और पार्थ भौमिक।
इस गुट को सरकार और लोकसभा अध्यक्ष की ओर से ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) के रूप में एक अलग राजनीतिक दल की औपचारिक मान्यता भी मिल गई है। सदन में सुदीप बंद्योपाध्याय को एनसीपीआई (NCPI) का नेता और डॉ. काकोली घोष दस्तिदार को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने इस नवगठित दल को संसद सत्र से पहले होने वाली पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण भी भेज दिया है, जिससे टीएमसी की मुश्किलें संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह बढ़ गई हैं।
