महबूबा मुफ्ती की नेशनल कॉन्फ्रेंस को दो टूक: ‘सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं, अनुच्छेद 370 की बहाली हो मुख्य एजेंडा, वरना प्रदर्शन से रहेंगे दूर’
महबूबा मुफ्ती की नेशनल कॉन्फ्रेंस को दो टूक: ‘सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं, अनुच्छेद 370 की बहाली हो मुख्य एजेंडा, वरना प्रदर्शन से रहेंगे दूर’
जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से दूरी बना ली है। महबूबा मुफ्ती ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि इस प्रदर्शन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को मुख्य रूप से शामिल किया जाएगा, तभी पीडीपी इस आंदोलन का हिस्सा बनेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए महबूबा मुफ्ती ने लिखा:
”गहन विचार-विमर्श के बाद पीडीपी ने जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है, लेकिन शर्त यह है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई इस एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो। सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा।”
’भाजपा के गैर-कानूनी कदमों को वैधता मिलने का जाएगा संदेश’
महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को एक औपचारिक पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने निमंत्रण के लिए धन्यवाद देते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। महबूबा ने लिखा, “अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची हूं कि ऐसे विरोध प्रदर्शन में शामिल होना हमारे लिए उचित नहीं होगा, जिसका उद्देश्य केवल राज्य का दर्जा बहाल करना हो। यह एक आधी-अधूरी मांग है।”
उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि केवल पूर्ण राज्य की मांग करने से ऐसा संदेश जाएगा जैसे हम भाजपा द्वारा 5 अगस्त, 2019 को उठाए गए गैर-कानूनी और असंवैधानिक कदमों को स्वीकार कर रहे हैं। इससे केंद्र सरकार के फैसले को एक तरह से वैधता मिल जाएगी। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने जिस सामूहिक अपमान और पीड़ा का सामना किया है, वह आज भी उनके जेहन में है और हमारी लड़ाई प्रतीकात्मक कदमों के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण संवैधानिक अधिकारों के लिए है।
चुनावी घोषणापत्र और जनता के विश्वास की दिलाई याद
फारूक अब्दुल्ला को निशाने पर लेते हुए महबूबा मुफ्ती ने पत्र में आगे लिखा, “आपने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और उसकी शेष संवैधानिक शक्तियां बहाल करने के लिए संघर्ष करेगी। लोगों ने आपकी पार्टी के घोषणापत्र तथा अनुच्छेद 370 की बहाली के शांतिपूर्ण संघर्ष के वादे पर विश्वास करके ही आपको जनसमर्थन दिया है। जनता को मिला यह जनादेश उनकी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिससे पीछे नहीं हटा जा सकता।”
कांग्रेस ने भी सुर में मिलाया सुर: सिर्फ स्टेटहुड काफी नहीं, ‘स्टेटहुड प्लस’ चाहिए
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी लगातार जम्मू-कश्मीर के “छीने गए अधिकारों” को वापस दिलाने के पक्ष में रही है।
पवन खेड़ा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के संदर्भ में बात करते हुए कहा, “यह विरोध प्रदर्शन राज्य का दर्जा पाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस पिछले दो साल से ‘स्टेटहुड प्लस’ की वकालत कर रही है। ‘स्टेटहुड प्लस’ का सीधा मतलब यह है कि सिर्फ नाम के लिए राज्य का दर्जा वापस मिलना काफी नहीं है, बल्कि वहां के स्थानीय लोगों की ज़मीन और नौकरी के अधिकारों के लिए मजबूत संवैधानिक गारंटी भी मिलनी चाहिए। इसलिए सिर्फ़ राज्य का दर्जा काफ़ी नहीं है।”
