Sunday, July 19, 2026
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अयोध्या राम मंदिर विवाद में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा, ट्रस्ट के पुनर्गठन और वित्तीय लेन-देन के फोरेंसिक ऑडिट की मांग

अयोध्या राम मंदिर विवाद में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा, ट्रस्ट के पुनर्गठन और वित्तीय लेन-देन के फोरेंसिक ऑडिट की मांग

​अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के करीब सात साल बाद निर्मोही अखाड़े ने शीर्ष अदालत में एक नई याचिका दाखिल की है। अखाड़े का गंभीर आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा गठित ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की कार्यप्रणाली और उसके सदस्यों पर कड़े सवाल उठाए गए हैं।

​’ट्रस्ट में उन लोगों को जगह मिली जिनका राम मंदिर से कोई नाता नहीं’

​निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के ढांचे पर आपत्ति जताई है। अखाड़े का कहना है कि केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन तो कर दिया, लेकिन इसमें ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया जिनका राम जन्मभूमि आंदोलन या इसके इतिहास से कोई ऐतिहासिक, धार्मिक या कानूनी संबंध ही नहीं रहा है। इसके साथ ही अखाड़े ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कुछ मौजूदा सदस्यों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे राम मंदिर की पवित्र छवि और जनमानस की आस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

​ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व और पारंपरिक पूजा की मांग

​याचिका में निर्मोही अखाड़े ने सेवायत (शेबैत) के पारंपरिक अधिकारों का हवाला देते हुए ट्रस्ट में अपनी भूमिका तय करने की मांग की है। अखाड़े की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

​ट्रस्ट का पुनर्गठन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक पारदर्शी सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में दोबारा गठित किया जाए और ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए साफ व कड़े नियम बनाए जाएं।

​निर्मोही अखाड़े को स्थान: किसी भी मंदिर का संचालन उसके पारंपरिक सेवायत के बिना अधूरा है, इसलिए ट्रस्ट में अखाड़े को उचित जगह और निर्णयात्मक भूमिका दी जाए।

​रामानंदी परंपरा से पूजा: मंदिर परिसर के भीतर सभी प्रकार की पूजा, सेवा और भोग अनिवार्य रूप से ‘रामानंदी बैरागी संप्रदाय’ की पारंपरिक पद्धति के अनुसार ही आयोजित कराए जाएं।

​मूल मूर्तियों की पुनर्स्थापना: याचिका में श्री रामलला विराजमान की मूल मूर्तियों को मंदिर में फिर से स्थापित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

​वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट और स्वतंत्र समिति की मांग

​निर्मोही अखाड़े ने कोर्ट से मांग की है कि साल 2019 के फैसले के बाद से अब तक हुए सभी कार्यों और उसके पालन की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति (Independent Committee) का गठन किया जाए। इसके अलावा, अखाड़े ने राम मंदिर ट्रस्ट के तहत हुए सभी वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) का फोरेंसिक ऑडिट कराए जाने की भी पुरजोर मांग की है ताकि पारदर्शिता सामने आ सके।

​याचिका में कोर्ट से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की अपील की गई है कि वह ट्रस्ट डीड में उचित संशोधन करे और ‘रामानंदी बैरागी संप्रदाय’ के योग्य सदस्यों को मिलाकर एक ‘निगरानी बोर्ड’ का गठन करे, जो न्यासी मंडल (Board of Trustees) के कामकाज पर नजर रख सके। अखाड़े के अनुसार, ट्रस्टियों का चयन केवल उच्च सत्यनिष्ठा और साफ छवि वाले उन लोगों में से होना चाहिए जिनका रामानंदी परंपराओं से गहरा जुड़ाव रहा हो।

​चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की कार्रवाई जारी

​इस पूरे कानूनी विवाद के बीच, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने का मामला भी गरमाया हुआ है, जिसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है। पुलिस ने इस चोरी के मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। फिलहाल, मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है ताकि चोरी के इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

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