Saturday, July 18, 2026
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पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण को किया गया जमींदोज

पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण को किया गया जमींदोज

​पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर प्रशासन का बुलडोजर चला है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कार्रवाई की वजह कार्यालय के एक हिस्से को ‘अवैध रूप से निर्मित’ होना बताया है। यह पांच मंजिला इमारत अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित है, जिसे शनिवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया।

​नोटिस का जवाब न मिलने पर प्रशासन ने उठाया सख्त कदम

​प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, साउथ 24 परगना में स्थित डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के इस कार्यालय पर पहले ही एक आधिकारिक नोटिस चपका दिया गया था। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि इमारत का एक बड़ा हिस्सा बिना आवश्यक सरकारी मंजूरी और वैध दस्तावेजों के बनाया गया है। प्रशासन ने इस संबंध में जवाब और दस्तावेज मांगे थे, लेकिन अभिषेक बनर्जी या उनकी टीम की तरफ से समय सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी के चलते शनिवार सुबह प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

​टीएमसी का अहम सियासी गढ़ था यह कार्यालय

​अमलता-बारुईपुर रोड पर स्थित यह पांच मंजिला इमारत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्रों में से एक मानी जाती थी। यहां अक्सर पार्टी की बड़ी और रणनीतिक बैठकें आयोजित होती थीं। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही यह कार्यालय बंद पड़ा था और यहां सन्नाटा पसरा हुआ था। लंबे समय से बंद होने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण आखिरकार प्रशासन ने यह दंडात्मक कार्रवाई की।

​कार्रवाई के बाद गरमाया बंगाल का सियासी पारा

​सत्तारूढ़ पार्टी के इतने बड़े नेता और मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य के दफ्तर पर हुए इस अप्रत्याशित ‘बुलडोजर एक्शन’ से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बवाल मचना तय माना जा रहा है। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। इस घटना के बाद से राज्य का सियासी पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है और विपक्षी व सत्तापक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।

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