अल नीनो का खतरा बरकरार, 197 जिलों के लिए सरकार ने तैयार किया इमरजेंसी प्लान
अल नीनो का खतरा बरकरार, 197 जिलों के लिए सरकार ने तैयार किया इमरजेंसी प्लान
मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन अगस्त-सितंबर में कम बारिश की आशंका
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने भले ही इस बार थोड़ी देरी से दस्तक दी हो, लेकिन इसकी प्रगति तेज रही है। 4 जून को केरल पहुंचने के बाद मात्र छह दिनों में मॉनसून 13 राज्यों तक फैल चुका है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों और सरकार की चिंता अभी भी बनी हुई है, क्योंकि अल नीनो के प्रभाव से अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर के 197 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां अल नीनो का असर सबसे अधिक पड़ सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि संभावित सूखे और कम बारिश की चुनौती से निपटने के लिए सभी राज्यों के लिए अलग-अलग आपातकालीन योजनाएं तैयार की गई हैं।
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?
अल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है। इसका सीधा असर भारतीय मॉनसून पर पड़ता है और अक्सर यह बारिश को कमजोर कर देता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है और दीर्घकालिक औसत वर्षा का लगभग 90 प्रतिशत ही होने का अनुमान है। यदि मॉनसून के दूसरे चरण में अल नीनो और अधिक सक्रिय हुआ तो कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत तैयारियां तेज
कृषि मंत्रालय ने किसानों को संभावित संकट से बचाने के लिए देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया है। कृषि मंत्री ने बताया कि जोखिम वाले जिलों में लगातार निगरानी की जा रही है और हर सप्ताह समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य कृषि संसाधनों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही प्रत्येक राज्य के लिए अलग आपातकालीन कार्ययोजना तैयार की गई है ताकि कम वर्षा की स्थिति में किसानों को राहत दी जा सके।
देश के 30 प्रतिशत हिस्से तक पहुंचा मॉनसून
मॉनसून फिलहाल तेजी से आगे बढ़ रहा है। केरल से शुरू होकर यह तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। वहीं पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में भी व्यापक वर्षा हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अभी देश के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से को कवर कर चुका है और 15 जुलाई तक पूरे देश में फैलने की संभावना है। हालांकि जुलाई के अंत और अगस्त में अल नीनो के प्रभाव के तेज होने का अनुमान है।
अगस्त-सितंबर में बढ़ सकती है सूखे की आशंका
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त और सितंबर में वर्षा में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उत्तर भारत, पश्चिमी राज्यों और मध्य भारत पर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रीवा, शहडोल, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से काफी कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। वहीं पंजाब, हरियाणा और राजस्थान भी अल नीनो की मार झेल सकते हैं।
खरीफ फसलों पर मंडरा रहा संकट
देश के लगभग 60 प्रतिशत किसान खरीफ फसलों, विशेषकर धान की खेती के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं। यदि वर्षा में कमी आती है तो धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सामान्य मॉनसून के कारण देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हुआ है, लेकिन इस वर्ष मौसम की चुनौती कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही भीषण गर्मी और लू का असर देखा जा रहा है। ऐसे में यदि मॉनसून कमजोर रहता है तो जलाशयों के भराव और भूजल स्तर पर असर पड़ सकता है। इससे पेयजल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ जाएगी।
WMO की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी World Meteorological Organization (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि अल नीनो तेजी से सक्रिय हो रहा है। एजेंसी के अनुसार अगस्त तक इसके पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना 80 प्रतिशत तक है और सितंबर तक इसके और मजबूत होने के संकेत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष ‘सुपर अल नीनो’ जैसी स्थिति भी बन सकती है, जिसका असर वैश्विक मौसम और भारतीय मॉनसून दोनों पर पड़ सकता है।
