कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू: सोनिया गांधी ने जारी किया वीडियो, मोदी सरकार पर ‘बुलडोजर’ चलाने का आरोप
कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू: सोनिया गांधी ने जारी किया वीडियो, मोदी सरकार पर ‘बुलडोजर’ चलाने का आरोप
कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, जो 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इस अभियान के तहत कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करने और उस पर ‘बुलडोजर’ चलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
वीडियो में सोनिया गांधी ने क्या कहा?
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 20 साल पहले (2005 में) डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में संसद में आम सहमति से मनरेगा कानून पास हुआ था। यह क्रांतिकारी कदम था, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों – खासकर वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब लोगों – को रोजगार का कानूनी हक दिया।
उन्होंने कहा: “कांग्रेस का मनरेगा को लाने और लागू करने में बड़ा योगदान था, लेकिन यह कभी पार्टी का मामला नहीं था। ये देशहित और जनहित से जुड़ी योजना थी।”
मोदी सरकार पर तीखा हमला: “सरकार ने इस कानून को कमजोर करके करोड़ों किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के हितों पर हमला किया है। महात्मा गांधी का नाम हटाया और योजना के रूप-स्वरूप में मनमाने बदलाव किए। अब दिल्ली में बैठकर तय होगा कि किसे, कहां और कितना रोजगार मिलेगा – जो जमीनी हकीकत से दूर है।”
उन्होंने कहा: “20 साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मेरी तरह कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं।”
अभियान का उद्देश्य और विवाद
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने MGNREGA को खत्म कर विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या VB-G-RAM-G एक्ट लाया, जो अधिकार-आधारित नहीं बल्कि सरकार की मर्जी पर निर्भर है। इससे पंचायतों की भूमिका कमजोर हुई, राज्य सरकारों का बोझ बढ़ा और ग्रामीणों के अधिकार छिन गए।
अभियान के तहत देशभर में ग्राम पंचायतों में बैठकें, ‘काम मांगो अभियान’, नुक्कड़ सभाएं, पत्र वितरण और धरने होंगे। पार्टी ने 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
कांग्रेस ने VB-G-RAM-G एक्ट को वापस लेने और मूल MGNREGA को बहाल करने की मांग की है। यह अभियान ग्रामीण भारत में रोजगार, मजदूरी और जवाबदेही के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है।
यह अभियान कांग्रेस की ‘जनहित’ वाली छवि मजबूत करने की कोशिश है, खासकर ग्रामीण वोट बैंक को साधने के लिए। क्या आपको लगता है मनरेगा पर यह हमला सही है या सरकार का फैसला जरूरी था? कमेंट्स में बताएं!
