राजनीति

‘मुस्लिमों का नया मसीहा बनने की होड़?’ BMC चुनाव से पहले फडणवीस का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला

‘मुस्लिमों का नया मसीहा बनने की होड़?’ BMC चुनाव से पहले फडणवीस का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला

मुंबई, 8 जनवरी 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए पूछा है, “मुसलमानों का नया मसीहा कौन?” यह बयान आगामी ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से ठीक पहले आया है, जो मुंबई की सत्ता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। फडणवीस का यह वार ठाकरे की हालिया मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टिप्पणियों और राजनीतिक रणनीति पर केंद्रित है, जिसे बीजेपी ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दे रही है।

फडणवीस ने बुधवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “कुछ लोग मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए खुद को उनका मसीहा साबित करने पर तुले हैं। लेकिन महाराष्ट्र की जनता सब समझती है। मुंबई को विकास चाहिए, न कि विभाजनकारी राजनीति।” उन्होंने ठाकरे पर आरोप लगाया कि शिवसेना (UBT) मुस्लिमों को लुभाने के लिए ‘नकली सहानुभूति’ दिखा रही है, जबकि असली मुद्दे जैसे बुनियादी सुविधाएं, पानी की समस्या और ट्रैफिक जाम पर चुप है। फडणवीस ने यह भी कहा कि ठाकरे की पार्टी अब ‘हिंदुत्व’ से दूर होकर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण में लगी है, जो बालासाहेब ठाकरे की विरासत के खिलाफ है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव ठाकरे ने हाल ही में एक रैली में मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों पर जोर दिया था। ठाकरे ने कहा था कि “मुंबई सबकी है, और हम हर समुदाय को साथ लेकर चलेंगे।” लेकिन बीजेपी इसे चुनावी चाल बता रही है। BMC चुनाव फरवरी 2026 में होने वाले हैं, और मुंबई में मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है, खासकर दक्षिण मुंबई, बांद्रा और गोवंडी जैसे इलाकों में। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह शिवसेना (UBT) को ‘एंटी-हिंदू’ दिखाकर हिंदू वोटों को मजबूत करना चाहती है।

शिवसेना (UBT) ने फडणवीस के बयान पर पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, “फडणवीस खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार समझते हैं, लेकिन मुंबई की जनता जानती है कि असली मसीहा कौन है। हम तुष्टिकरण नहीं, न्याय की बात कर रहे हैं।” राउत ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी मुंबई को ‘गुजरात मॉडल’ पर चलाना चाहती है, जो स्थानीय मुद्दों से दूर है।

BMC चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम हैं, क्योंकि यह मुंबई की 2,000 करोड़ से ज्यादा की बजट वाली निकाय है। 2017 के चुनावों में शिवसेना ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं, लेकिन अब शिंदे गुट और बीजेपी गठबंधन मजबूत स्थिति में है। चुनाव से पहले ऐसे बयानबाजी से माहौल और गर्म हो गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण दोनों पार्टियों के लिए फायदेमंद या नुकसानदेह साबित हो सकता है।

महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन पार्टनर बीजेपी को पूरा समर्थन दे रहे हैं। चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण रहें। क्या यह वार BMC चुनावों का नतीजा बदल देगा? यह देखना बाकी है, लेकिन मुंबई की सड़कों पर राजनीतिक जंग और तेज हो गई है।

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