उत्तराखंड

बैक-टू-बैक विवादों में घिरी भाजपा: अंकिता भंडारी से एजेंल चकमा तक, क्या ‘डैमेज कंट्रोल’ फेल हो रहा? पार्टी का दावा – ‘ट्रैक पर हैं हम’

बैक-टू-बैक विवादों में घिरी भाजपा: अंकिता भंडारी से एजेंल चकमा तक, क्या ‘डैमेज कंट्रोल’ फेल हो रहा? पार्टी का दावा – ‘ट्रैक पर हैं हम’

नए साल के पहले सप्ताह में ही भाजपा एक के बाद एक विवादों की चपेट में आ गई है। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड का पुराना जख्म फिर हरा हो गया, तो त्रिपुरा में आदिवासी छात्रा एजेंल चकमा के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला गरमा गया। इन विवादों ने पार्टी के ‘डैमेज कंट्रोल’ तंत्र पर सवाल उठा दिए हैं। विपक्ष इसे भाजपा की ‘स्ट्रेटजी फेल’ बता रहा है, जबकि पार्टी सूत्र कहते हैं – “हम डिरेल नहीं हुए, ये सब विपक्ष की साजिश है।”

उत्तराखंड का अंकिता विवाद फिर सुर्खियों में

अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया ट्विस्ट तब आया जब उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के बीच का कथित ऑडियो वायरल हुआ। कांग्रेस ने इसे मौका मानकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सबूत मिटाने और जांच प्रभावित करने के आरोप लगाए। पीसीसी चीफ गणेश गोदियाल ने तो यहां तक कह दिया कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को प्रदेश में नेतृत्व बदलना पड़ेगा। पार्टी ने इसे ‘निजी झगड़ा’ बताकर खारिज किया, लेकिन सोशल मीडिया पर #JusticeForAnkita फिर ट्रेंड करने लगा।

त्रिपुरा में एजेंल चकमा मामला

त्रिपुरा के अगरतला में आदिवासी छात्रा एजेंल चकमा के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप भाजपा समर्थक युवकों पर लगा। विपक्षी टीएमसी और सीपीएम ने इसे ‘आदिवासी विरोधी चेहरा’ बताकर प्रदर्शन किए। मामला इतना बढ़ा कि केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक को सफाई देनी पड़ी। भाजपा ने आरोपी युवकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया और कहा कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन आदिवासी बहुल इलाकों में असंतोष बढ़ गया।

विपक्ष का कहना है कि ये बैक-टू-बैक घटनाएं भाजपा की ‘पॉलिटिकल मैनेजमेंट’ की नाकामी दिखाती हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “पार्टी अब छोटे विवादों को भी कंट्रोल नहीं कर पा रही। 2027 की तैयारी में ये झटके महंगे पड़ सकते हैं।”

भाजपा का पलटवार: ‘डिरेल नहीं, ट्रैक पर हैं’

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “ये सब विपक्ष की हताशा है। अंकिता केस में SIT जांच कर रही है, एजेंल मामले में आरोपी निष्कासित हैं। हम जनता के बीच काम से जवाब दे रहे हैं – अर्थव्यवस्था 7.4% ग्रोथ पर है, ट्रंप के साथ रिश्ते मजबूत हैं। छोटे-मोटे विवादों से हम डिरेल नहीं होते।”

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ये घटनाएं स्थानीय स्तर पर तो नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की कोर वोटबैंक अभी मजबूत है। फिर भी, बैक-टू-बैक विवादों ने पार्टी के क्राइसिस मैनेजमेंट पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्या ये सिर्फ ‘क्षेत्रीय शोर’ है या बड़ा संकेत – आने वाले महीने बताएंगे।

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