वल्गर रील्स के चलते हुमायूं कबीर ने काटा निशा चटर्जी का टिकट: 24 घंटे में यू-टर्न, हिंदू होने का आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की धमकी!
वल्गर रील्स के चलते हुमायूं कबीर ने काटा निशा चटर्जी का टिकट: 24 घंटे में यू-टर्न, हिंदू होने का आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की धमकी!
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) लॉन्च करने के महज 24 घंटे बाद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशा चटर्जी का बालिगंज सीट से टिकट काट दिया। कबीर ने वजह बताई कि निशा के सोशल मीडिया रील्स और फोटोज “अशोभनीय” (vulgar/inappropriate) हैं, जो पार्टी की इमेज के लिए ठीक नहीं। लेकिन निशा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें हिंदू होने की वजह से हटाया गया है और यह धार्मिक भेदभाव है। उन्होंने कबीर पर मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है।
मामले की पूरी डिटेल्स:
22 दिसंबर 2025 को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में JUP लॉन्च की और 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इसमें दक्षिण कोलकाता की बालिगंज सीट से निशा चटर्जी का नाम शामिल था। निशा एक पॉपुलर इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके TikTok और Instagram पर लाखों फॉलोअर्स हैं। उनके रील्स में डांस, लाइफस्टाइल और बोल्ड फैशन दिखता है।
अगले दिन (23 दिसंबर) कबीर ने यू-टर्न लिया। उन्होंने कहा, “निशा के सोशल मीडिया पोस्ट्स और अंदाज विधानसभा जैसे पवित्र जगह के लिए उपयुक्त नहीं। पार्टी वर्कर्स ने भी आपत्ति जताई।” कबीर ने ऐलान किया कि बालिगंज से मुस्लिम उम्मीदवार उतारेंगे। बाद में उन्होंने रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर अबुल हसन को टिकट दे दिया।
निशा ने जवाब दिया, “सुबह तक मेरे पोस्ट्स ठीक थे, शाम को वल्गर हो गए? हुमायूं ‘काकू’ ने खुद मुझे कैंडिडेट बनाया। मैंने उनकी बाबरी मस्जिद वाली योजना का समर्थन किया था। अब हिंदू होने की वजह से मुझे हटा दिया। उनकी सेक्युलर पार्टी का झूठा चेहरा सामने आ गया। मैं कोर्ट जाऊंगी, क्योंकि मेरी इमेज खराब की गई।”
बैकग्राउंड:
हुमायूं कबीर को TMC ने दिसंबर 2025 में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का शिलान्यास करने पर सस्पेंड किया था। वे अल्पसंख्यक वोट बैंक पर फोकस कर नई पार्टी बना रहे हैं और 2026 विधानसभा चुनाव में 100+ सीटों पर लड़ने का दावा कर रहे हैं। निशा को शामिल करना उनकी सेक्युलर इमेज बनाने की कोशिश थी, लेकिन अब यह विवाद उल्टा पड़ गया।
यह मामला धार्मिक भेदभाव और महिलाओं की इमेज पर सवाल उठा रहा है। निशा इंडिपेंडेंट लड़ने का भी सोच रही हैं। बंगाल की सियासत में यह नया तूफान 2026 चुनावों से पहले गरमा सकता है!
