चीन भारत-अमेरिका संबंधों में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहा: अमेरिकी पेंटागन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!
चीन भारत-अमेरिका संबंधों में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहा: अमेरिकी पेंटागन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!
वाशिंगटन। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है कि चीन भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम होने का फायदा उठाकर द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना चाहता है, ताकि भारत-अमेरिका के रिश्तों को और गहरा होने से रोका जा सके। ‘Military and Security Developments Involving the People’s Republic of China 2025’ नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में भारत-चीन के बीच डिसइंगेजमेंट समझौते के बाद बीजिंग इस मौके का इस्तेमाल कर रहा है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
चीन LAC पर तनाव कम होने को “कैपिटलाइज” करना चाहता है, यानी इसका फायदा उठाकर भारत से रिश्ते सामान्य करना और US-India टाइज को डीप होने से रोकना।
हालांकि, भारत चीन की मंशा और एक्शंस पर शक करता रहेगा। दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास और अन्य मुद्दे रिश्तों को सीमित रखेंगे।
रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश को चीन के “कोर इंटरेस्ट” में शामिल बताया गया है, जो ताइवान, साउथ चाइना सी और सेनकाकू आइलैंड्स के साथ जोड़ा गया। यह चीन की 2049 तक “ग्रेट रिजुवेनेशन” की रणनीति का हिस्सा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 में BRICS समिट से पहले मोदी-शी की मीटिंग के बाद दोनों देशों ने हाई-लेवल मीटिंग्स शुरू कीं – बॉर्डर मैनेजमेंट, डायरेक्ट फ्लाइट्स, वीजा और एकेडमिक एक्सचेंज पर बात हुई। लेकिन पेंटागन का मानना है कि चीन का मकसद भारत को अमेरिका से दूर रखना है।
भारत की सतर्कता:
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि भारत चीन की हरकतों पर नजर रखेगा और अविश्वास बना रहेगा। पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने भी कहा कि चीन भारत-अमेरिका रिश्तों को रोकने की कोशिश कर सकता है, लेकिन सफल नहीं होगा।
यह रिपोर्ट इंडो-पैसिफिक में चीन की रणनीति को उजागर करती है, जहां भारत-अमेरिका की नजदीकी बीजिंग के लिए चुनौती है। क्या चीन की यह कोशिश कामयाब होगी? आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन भारत की सतर्कता और US के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मजबूत बनी हुई है!
