Friday, June 26, 2026
अन्तर्राष्ट्रीय

छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद सुलग उठा ढाका: मीडिया हाउसों में आगजनी, भारतीय सहायक उच्चायोग पर पत्थरबाजी; हिंसा की भयावह तस्वीरें

छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद सुलग उठा ढाका: मीडिया हाउसों में आगजनी, भारतीय सहायक उच्चायोग पर पत्थरबाजी; हिंसा की भयावह तस्वीरें

बांग्लादेश की राजधानी ढाका और कई अन्य शहरों में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी (32) की मौत के बाद भयंकर हिंसा भड़क उठी है। हादी, जो 2024 के जुलाई गणअभ्युत्थान के प्रमुख चेहरों में से एक थे और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता थे, 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारे जाने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिंगापुर में इलाज के दौरान 18 दिसंबर की रात उनकी मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए, जिन्होंने सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही और हत्यारों को पनाह देने का आरोप लगाया।

हिंसा कैसे भड़की?

मौत की सूचना मिलते ही ढाका के शाहबाग चौराहे पर हजारों लोग जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए – “हादी भाई अमर रहे” और “हत्यारों को न्याय दिलाओ”। गुस्सा इतना बढ़ा कि प्रमुख मीडिया हाउसों प्रोथम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। कर्मचारी इमारतों में फंस गए, धुएं से सांस लेना मुश्किल हो गया। चटगांव (चिटागॉंग) में भारतीय सहायक उच्चायोग पर पत्थरबाजी हुई, जहां प्रदर्शनकारियों ने भारत पर हत्यारों को शरण देने का आरोप लगाते हुए भारत-विरोधी नारे लगाए। अवामी लीग के दफ्तरों, छायानट (बंगाली संस्कृति संस्था) और शेख मुजीबुर रहमान से जुड़ी संपत्तियों पर भी हमले हुए। राजशाही और अन्य शहरों में सड़कें जाम, आगजनी और झड़पें हुईं।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक तनाव: हादी भारत-विरोधी रुख के लिए जाने जाते थे और फरवरी 2026 के चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार थे। उनकी मौत से चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और गरमा गया। अंतरिम सरकार प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत को “राष्ट्र की अपूरणीय क्षति” बताया और शनिवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया। यूनुस ने शांति की अपील की और कहा कि हिंसा से बचें, जांच पूरी पारदर्शिता से होगी। सरकार ने हादी के परिवार की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों में कुछ ने भारत पर आरोप लगाए कि हत्यारे वहां भाग गए हैं, जिससे भारत-विरोधी भावनाएं भड़कीं। पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस तैनात की गई हैं, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जुमे की नमाज के बाद और हिंसा बढ़ने की आशंका है।

यह हिंसा 2024 के आंदोलन की याद ताजा कराती है, जब शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अब चुनाव से पहले स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।

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