कर्नाटक: कोप्पल जिले के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील में कीड़े मिलने से हड़कंप, वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई
कर्नाटक: कोप्पल जिले के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील में कीड़े मिलने से हड़कंप, वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई
कोप्पल (कर्नाटक): कर्नाटक के कोप्पल जिले में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने की घटना ने पूरे राज्य में हंगामा मचा दिया है। यह मामला कोप्पल तालुक के हले निंगापुर (ओल्ड निंगापुर) गांव के सरकारी हायर प्राइमरी स्कूल का है, जहां छात्रों को दिए गए चावल और सांभर में कीड़े पाए गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें बच्चे प्लेट से कीड़े निकालकर दिखा रहे हैं।
घटना मंगलवार (15 दिसंबर 2025) की बताई जा रही है। छात्रों ने खाने में कीड़े देखते ही स्कूल स्टाफ और अपने माता-पिता को सूचना दी। इसके बाद स्कूल में जमा हुए अभिभावकों ने भोजन की गुणवत्ता और स्कूल में सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। माता-पिता ने आरोप लगाया कि अक्षरा दासोहा योजना के तहत सप्लाई किया गया अनाज लंबे समय तक गोदामों में स्टोर रहने के कारण खराब हो गया, जिससे उसमें कीड़े लग गए। उन्होंने मांग की कि चावल की गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं की जा रही है।
स्कूल विकास और निगरानी समिति (एसडीएमसी) के अध्यक्ष हनुमंतप्पा हट्टी ने कहा कि यह एक अलग-थलग घटना हो सकती है, लेकिन सफाई और गुणवत्ता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, अभिभावकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
इस घटना ने जिले में मिड-डे मील योजना की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कोप्पल जिले में रोजाना करीब 2.8 लाख बच्चे इस योजना पर निर्भर हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अन्य स्कूलों जैसे कुश्तगी तालुक के मुद्देनहल्ली में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस मामले पर सिद्धारमैया सरकार की आलोचना की और बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। यूजर द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार, घटना में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन लोगों को निष्कासित (सस्पेंड) कर दिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में हेडमास्टर को शो-कॉज नोटिस जारी करने की भी बात सामने आई है। शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और सप्लाई चेन में खामियों की पड़ताल की जा रही है।
यह घटना बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी सरकारी योजनाओं में लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनाज की स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और गुणवत्ता जांच में सख्ती बरतने की जरूरत है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट आने के बाद और कार्रवाई होने की उम्मीद है। फिलहाल, अभिभावक बच्चों को स्कूल भोजन न देने की चेतावनी दे रहे हैं।
यह मामला एक बार फिर मिड-डे मील योजना की निगरानी और सुधार की मांग को बल देता है, ताकि बच्चों की थाली में पोषण के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
