राजनीति

बिहार में दिसंबर में मंत्रिमंडल विस्तार: जेडीयू को 6 और बीजेपी को 3 नई मंत्री पद, NDA का संतुलन

बिहार में दिसंबर में मंत्रिमंडल विस्तार: जेडीयू को 6 और बीजेपी को 3 नई मंत्री पद, NDA का संतुलन

पटना: बिहार में नीतीश कुमार सरकार के गठन के एक महीने बाद मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव 2025 में ऐतिहासिक जीत के बाद नवंबर में शपथ लेने वाली 26 सदस्यीय कैबिनेट को दिसंबर में और मजबूत करने का फैसला हुआ है। सूत्रों के अनुसार, जनता दल (यूनाइटेड) को 6 और भारतीय जनता पार्टी को 3 विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा, जिससे कुल सदस्यों की संख्या 36 के अधिकतम सीमा तक पहुंच जाएगी। यह विस्तार 15-20 दिसंबर के बीच होने की संभावना है, जो NDA के बीच सीट बंटवारे के अनुपात को दर्शाएगा।

वर्तमान कैबिनेट में BJP के पास 14, JD(U) के पास 9, LJP(RV) के पास 2, HAM(S) के पास 1 और RLM के पास 1 मंत्री हैं। नवंबर 20 को शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने महत्वपूर्ण विभाग संभाले। पोर्टफोलियो वितरण 21 नवंबर को हुआ, जिसमें BJP को होम, हेल्थ, रोड कंस्ट्रक्शन और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख विभाग मिले। JD(U) को फाइनेंस, ग्रामीण विकास और अन्य क्षेत्र सौंपे गए।

मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला NDA नेताओं की दिल्ली बैठक में लिया गया, जहां सीट अनुपात (BJP-89, JD(U)-85) के आधार पर बंटवारा तय हुआ। JD(U) के 6 नए मंत्री में भूमिहार, कुशवाहा और अन्य समुदायों के विधायक शामिल हो सकते हैं, जबकि BJP के 3 में पिछड़े वर्ग और OBC फोकस रहेगा। फरवरी 2025 में पहले ही 7 BJP विधायकों—संजय सरावगी, सुनील कुमार, जीवेश कुमार, राहुल कुमार सिंह, मोती लाल प्रसाद, विजय कुमार मंडल और कृष्ण कुमार मंटू—को मंत्री बनाया गया था, जो विस्तार का हिस्सा था। अब दिसंबर में यह प्रक्रिया पूरी होगी, ताकि बजट सेशन से पहले सरकार स्थिर हो।

यह विस्तार NDA की एकजुटता को मजबूत करेगा, खासकर 2028 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर। नीतीश कुमार ने कहा, “विस्तार से विकास योजनाओं को गति मिलेगी, जैसे 1 करोड़ नौकरियां और लाखपति दीदी योजना।” BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इसे “सुशासन का विस्तार” बताया। विपक्षी RJD ने इसे “पावर शेयरिंग का ड्रामा” करार दिया, लेकिन NDA के पास 202 सीटों का मजबूत बहुमत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जातिगत संतुलन बनाए रखेगा, जहां BJP OBC-ईबीसी पर फोकस करेगी और JD(U) कोर वोटरों को मजबूत करेगी। कुल मिलाकर, दिसंबर का यह विस्तार बिहार को नई ऊर्जा देगा।

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