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‘मैं यह दबाव नहीं झेल पा रही हूं…’ : वर्क प्रेशर में पश्चिम बंगाल में एक और BLO ने दी जान, SIR प्रक्रिया पर सवाल

‘मैं यह दबाव नहीं झेल पा रही हूं…’ : वर्क प्रेशर में पश्चिम बंगाल में एक और BLO ने दी जान, SIR प्रक्रिया पर सवाल

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में एक और दर्दनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) रिंकू तरफदार (उम्र 40 वर्ष) ने 21 नवंबर 2025 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा, “मैं यह दबाव नहीं झेल पा रही हूं… ऑनलाइन प्रक्रिया पूरा नहीं कर पा रही, काम का बोझ बहुत है।” परिवार का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के अत्यधिक वर्कलोड और प्रशासनिक दबाव ने उन्हें तनाव में डाल दिया था। यह घटना राज्य में BLOs की लगातार हो रही मौतों की कड़ी का हिस्सा है, जहां चुनाव आयोग (ECI) की SIR अभियान पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या हुआ था? घटना का पूरा विवरण

स्थान और समय: नादिया जिले के कृष्णानगर के शास्तीतला इलाके में रहने वाली रिंकू चापरा थाना क्षेत्र के बंगालझी इलाके में बूथ नंबर 202 की BLO थीं। शनिवार सुबह उनका शव घर की छत पर लटका मिला।

सुसाइड नोट: नोट में रिंकू ने बताया कि उन्होंने 90% फील्ड वर्क पूरा कर लिया था, लेकिन SIR की ऑनलाइन वेरिफिकेशन प्रक्रिया (जैसे फॉर्म 6/7/8 भरना, डेटा अपलोड) में तकनीकी दिक्कतों और समय की कमी से परेशान थीं। परिवार ने कहा, “वह इस्तीफा देना चाहती थीं, लेकिन दबाव इतना था कि सहन न हो सका।”

परिवार का बयान: पति और बच्चे ने पुलिस को बताया कि रिंकू सरकारी स्कूल में शिक्षिका भी थीं और BLO का अतिरिक्त काम उन्हें रात-दिन परेशान कर रहा था।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे वर्क स्ट्रेस से जुड़ा बताया गया है।

SIR प्रक्रिया: BLOs पर क्यों बढ़ा दबाव?

ECI ने 25 अक्टूबर 2025 से शुरू SIR अभियान के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने का लक्ष्य रखा है, ताकि फर्जी वोटर हटाए जाएं। लेकिन जमीनी स्तर पर BLOs (ज्यादातर वॉलंटरी शिक्षक) पर बोझ असहनीय हो गया:

काम का दायरा: हर BLO को 1200-1500 वोटर्स की लिस्ट चेक करनी है – घर-घर जाकर फॉर्म भरना, फोटो/डॉक्यूमेंट वेरिफाई करना, ऑनलाइन अपलोड। डेडलाइन 4 दिसंबर 2025।

तकनीकी चुनौतियां: ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट/स्मार्टफोन की कमी, ट्रेनिंग की कमी।

अन्य राज्यों में भी संकट: केरल (BLO अनीश), राजस्थान (BLO मुकेश, हरिओम), मध्य प्रदेश (BLO उदयभान, भुवन), गुजरात (BLO अरविंद), तमिलनाडु (BLO जहिता) में इसी प्रक्रिया से जुड़ी 15+ मौतें। पश्चिम बंगाल में ही शांति एका (जलपाईगुड़ी, 19 नवंबर) और नमिता की मौत हो चुकी। कुल 28 मौतें SIR से जुड़ी बताई जा रही हैं।

ममता बनर्जी का हमला: ECI पर ‘अमानवीय दबाव’ का आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ECI को पत्र लिखकर SIR रोकने की मांग की। उन्होंने कहा, “यह प्रक्रिया ‘खतरनाक’ और ‘अनियोजित’ है। BLOs मानवीय सीमा से परे काम कर रहे हैं, गलत फॉर्म भरने को मजबूर हो रहे। 28 मौतें हो चुकीं – डर और अनिश्चितता से। ECI को विवेक से काम लेना चाहिए, वरना अपरिवर्तनीय परिणाम होंगे।” बनर्जी ने प्रदर्शनों का समर्थन किया और राज्य स्तर पर BLOs को राहत देने के आदेश दिए।

ECI ने सफाई दी कि SIR पारदर्शिता के लिए जरूरी है, लेकिन BLOs की मौतों पर ‘गहन जांच’ का वादा किया।

BLOs की व्यथा: वॉलंटरी काम का बोझ क्यों घातक?

BLOs मतदान प्रक्रिया की रीढ़ हैं, लेकिन वे वॉलंटरी हैं – सरकारी कर्मचारी नहीं। SIR जैसे अभियानों में:

अतिरिक्त जिम्मेदारी: नॉन-एजुकेशनल वर्क (चुनाव ड्यूटी) शिक्षकों पर डालना आम है, लेकिन अब डिजिटल टास्क्स ने तनाव दोगुना कर दिया।

प्रदर्शन: पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान में BLOs ने हड़ताल की, SIR रोकने की मांग की।

विशेषज्ञ राय: ट्रेड यूनियंस का कहना – BLOs को पेड स्टाफ बनाना चाहिए, ट्रेनिंग बढ़ानी चाहिए।

क्या करें? सलाह और आगे की राह

ECI को अपील: अगर आप BLO हैं, तो स्थानीय अधिकारियों से राहत मांगें। हेल्पलाइन (ECI: 1950) पर शिकायत करें।

मेंटल हेल्थ सपोर्ट: तनाव में KIRAN हेल्पलाइन (1800-599-0019) कॉल करें। परिवारों को काउंसलिंग दें।

सिस्टम सुधार: सरकार को BLOs के लिए अलग कैडर बनाना चाहिए, डिजिटल टूल्स सुधारें।

यह घटना चुनाव प्रक्रिया की मजबूती के नाम पर मानवीय कीमत पर सवाल उठाती है। रिंकू जैसी मौतें रोकने के लिए तत्काल कदम जरूरी। प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना – मजबूत रहें। अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोत चेक करें। सुरक्षित रहें, मदद मांगने में संकोच न करें!

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