बिहार चुनाव हार के बाद लालू परिवार में फूट: रमीज नेमत कौन हैं, जिन्होंने रोहिणी को घर से निकाला?
बिहार चुनाव हार के बाद लालू परिवार में फूट: रमीज नेमत कौन हैं, जिन्होंने रोहिणी को घर से निकाला?
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन की करारी हार ने लालू प्रसाद यादव के परिवार को हिला दिया है। हार के महज 24 घंटे बाद ही RJD सुप्रीमो लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया। रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भाई तेजस्वी यादव के दो करीबियों – संजय यादव और रमीज नेमत – पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों ने उन्हें गाली दी, चप्पल से मारा और घर से निकाल दिया। इससे परिवार में भूचाल आ गया, और लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी रोहिणी के अपमान पर गुस्सा जाहिर किया।
रोहिणी के 15 नवंबर के पोस्ट ने तहलका मचा दिया। उन्होंने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने यही करने को कहा था। सवाल पूछा तो चप्पल उठाई गई।” रोहिणी, जो 2022 में लालू को किडनी दान कर चुकी हैं, ने देर रात घर छोड़कर एयरपोर्ट पहुंच गईं। तेज प्रताप ने कहा, “मैंने सब सह लिया, लेकिन बहन के अपमान को बर्दाश्त नहीं करूंगा। पिताजी से संकेत का इंतजार।” RJD के अंदरूनी कलह अब साफ नजर आ रही है, जहां तेज प्रताप पहले ही संजय यादव को ‘जयचंद’ बता चुके हैं।
तो रमीज नेमत कौन हैं, जिनका नाम लेकर रोहिणी ने परिवार तोड़ने का आरोप लगाया? रमीज नेमत खान (उम्र 35 वर्ष) उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं। वे एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं – उनके पिता पूर्व विधायक रह चुके हैं। रमीज तेजस्वी यादव के पुराने दोस्त और क्रिकेट साथी हैं। 2013 से ही वे तेजस्वी की कोर टीम का हिस्सा हैं, जो राजनीतिक रणनीति बनाते हैं। हाल के बिहार चुनाव में रमीज ने RJD के वार रूम की कमान संभाली, जहां सीट बंटवारा और कैंपेन स्ट्रैटेजी तय हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे हरियाणा के संजय यादव (RJD राज्यसभा सांसद) के साथ मिलकर तेजस्वी के इनर सर्कल को कंट्रोल करते हैं।
लेकिन रमीज का बैकग्राउंड विवादास्पद है। वे फिरोज पप्पू मर्डर केस के आरोपी हैं और गैंगस्टर एक्ट सहित 12 मामलों में नामजद हैं। बलरामपुर के तुलसीपुर थाने में हत्या का केस, कौशांबी के कोखराज में गैंगस्टर चार्ज – ये सभी 2018-2020 के हैं। रमीज और उनके साथी जेबा रिजवान जमानत पर बाहर हैं। यूपी ATS ने 2022 में उन्हें हिरासत में लिया था, लेकिन सबूतों की कमी से रिहा कर दिया। राजनीतिक हलकों में रमीज को ‘फिक्सर’ कहा जाता है, जो फंडिंग और लॉबिंग में माहिर हैं।
RJD ने अभी चुप्पी साध रखी है। लालू और राबड़ी देवी ने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी इन आरोपों को ‘निजी मामला’ बताकर टालना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कलह RJD की कमजोरी उजागर कर रही है। बिहार में NDA की जीत के बाद RJD को 75 सीटें मिलीं, लेकिन परिवारिक फूट से 2026 के लोकसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। रोहिणी ने कहा, “जनसेवा जारी रहेगी, लेकिन परिवार ने धोखा दिया।” क्या लालू परिवार संभलेगा या यह फूट स्थायी होगी? राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।
