राजनीति

बिहार चुनाव 2025: वोटिंग से पहले RJD को तगड़ा झटका, दिग्गज नेता सुरेश मेहता NDA में शामिल

बिहार चुनाव 2025: वोटिंग से पहले RJD को तगड़ा झटका, दिग्गज नेता सुरेश मेहता NDA में शामिल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग (6 नवंबर) से महज एक दिन पहले राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सुरेश मेहता ने सोमवार (3 नवंबर 2025) को पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया, जिससे महागठबंधन को करारा झटका लगा। यह घटना पटना में BJP बिहार प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की मौजूदगी में हुई, जहां मेहता ने औपचारिक रूप से NDA में शामिल होने की घोषणा की। RJD के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है क्योंकि मेहता बेगूसराय जिले के प्रभावशाली OBC नेता हैं, जिनका प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत माना जाता है।

सुरेश मेहता कौन हैं? RJD से NDA तक का सफर

सुरेश मेहता लंबे समय से RJD के कद्दावर नेता रहे हैं। वे बेगूसराय जिले के बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं, जहां उन्होंने 2005 और 2010 के चुनावों में RJD के टिकट पर जीत हासिल की थी। OBC समुदाय (कुर्मी) से ताल्लुक रखने वाले मेहता का प्रभाव बेगूसराय, समस्तीपुर और आसपास के जिलों में फैला हुआ है, जो महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण वोट बैंक है। उन्होंने RJD में रहते हुए पार्टी के कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया, लेकिन हाल के वर्षों में नीतीश कुमार सरकार के विकास कार्यों और BJP की रणनीति से प्रभावित होकर उन्होंने किनारा कर लिया। मेहता ने शामिल होने के बाद कहा, “RJD में भ्रष्टाचार और परिवारवाद हावी हो गया है। NDA के साथ मिलकर बिहार के विकास में योगदान दूंगा।” BJP ने उन्हें बछवाड़ा सीट से ही उम्मीदवार बनाने का संकेत दिया है, जहां वे मजबूत दावेदार बन सकते हैं।

RJD पर असर: महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल

RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए यह झटका इसलिए गंभीर है क्योंकि चुनावी रणनीति में OBC वोटों का बंटवारा हो सकता है। महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-वामपंथी) पहले से ही वोटर लिस्ट विवाद और सीट बंटवारे को लेकर दबाव में है। RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसे “BJP की साजिश” करार दिया, कहा कि “मेहता जैसे अवसरवादी नेता हमेशा सत्ता के साथ चलते हैं।” लेकिन आंकड़ों से साफ है कि NDA ने पहले ही 243 सीटों पर अपनी सीट शेयरिंग फाइनल कर ली है—BJP 101, JD(U) 101, LJP 29, HAM 6 और RLM 6 सीटें। मेहता की एंट्री से NDA को बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में फायदा हो सकता है, जहां 2015 और 2020 में महागठबंधन ने बढ़त बनाई थी। विपक्षी खेमे में अब और दल-बदल की आशंका बढ़ गई है।1d5363b75db9

चुनावी परिदृश्य: NDA मजबूत, महागठबंधन पर दबाव

बिहार चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, परिणाम 14 नवंबर को। NDA (BJP-JD(U)-LJP-HAM-RLM) ने अपनी उम्मीदवार सूची जारी कर मजबूत मोर्चा बना लिया है, जबकि जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) तीसरा विकल्प बनकर उभर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेहता जैसे नेताओं का पलायन महागठबंधन की एकजुटता को कमजोर कर सकता है, खासकर जब वोटर लिस्ट रिविजन से लाखों नाम कटने के आरोप लग रहे हैं। BJP प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने इसे “लोगों का NDA के प्रति विश्वास” बताया। यह घटना बिहार की सियासत को और रोमांचक बना रही है, जहां हर वोट और हर नेता की कीमत तय हो रही है।

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