राजनीति

सुल्तानपुर के मोची रामचेत की ‘बदली’ जिंदगी का क्या है सच? राहुल गांधी ने बिहार चुनाव में किया जिक्र, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही

सुल्तानपुर के मोची रामचेत की ‘बदली’ जिंदगी का क्या है सच? राहुल गांधी ने बिहार चुनाव में किया जिक्र, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के दलित मोची रामचेत की ‘बदली हुई जिंदगी’ का जिक्र किया। राहुल ने दावा किया कि छोटी सी मदद से रामचेत का जीवन पूरी तरह बदल गया है, और यह कांग्रेस की ‘न्याय योजना’ का उदाहरण है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स और रामचेत के बेटे की जुबानी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है – मशीन मिलने के बाद बिजनेस तो बढ़ा, लेकिन अब रामचेत बीमार हैं, दुकान धीमी पड़ गई है, और परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। यह मामला बिहार चुनाव में विपक्षी दलों के लिए तीर बन गया है, जहां NDA इसे ‘चुनावी ड्रामा’ बता रहा है।

राहुल गांधी ने 2 नवंबर को बेगूसराय की जनसभा में कहा, “सुल्तानपुर के रामचेत मोची को हमने एक सिलाई मशीन दी, आज वे अपना ब्रांड चला रहे हैं। छोटी मदद से बड़ी क्रांति आती है।” यह बयान लोकसभा में भी दोहराया गया, जहां राहुल ने इसे दलितों और पिछड़ों के सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। लेकिन आज तक, एनडीटीवी और टीवी9 की ग्राउंड रिपोर्ट्स से साफ है कि रामचेत की जिंदगी में बदलाव आया जरूर, लेकिन स्थायी नहीं।

रामचेत मोची की कहानी: मुलाकात से मदद तक

जुलाई 2024 में पहली मुलाकात: राहुल गांधी अमित शाह के मानहानि केस की पेशी के लिए सुल्तानपुर आए थे। दिल्ली लौटते समय वे रामचेत की छोटी सी दुकान (गुप्तारगंज के पास अयोध्या हाईवे पर) पर रुके। रामचेत, जो पेशे से मोची हैं और परिवार के साथ झोपड़ी में रहते हैं, ने राहुल को चप्पल सिलाई दिखाई। राहुल ने खुद चप्पल सिला, रामचेत से कारीगरी सीखी, और वादा किया कि मदद भेजेंगे। अगले दिन, जापान मेड सिलाई मशीन (कीमत 1 लाख रुपये) और आर्थिक सहायता भेजी गई।

बदलाव का दौर (2024-मई 2025): मशीन मिलने के बाद रामचेत की दुकान पर ग्राहक बढ़े। पहले रोज 100-150 रुपये कमाई थी, जो बढ़कर हजारों हो गई। राहुल ने रामचेत को दिल्ली बुलाया, जहां उन्होंने सोनिया और प्रियंका गांधी को चप्पल गिफ्ट की। मार्च 2025 में मुंबई ले जाकर चमड़ा कारोबारी सुधीर चमार से मिलवाया। रामचेत ने ‘रामचेत मोची’ ब्रांड लॉन्च करने की योजना बनाई, जिसमें 2-3 कारीगर रखे। राहुल ने खुद X पर फोटो शेयर की: “रामचेत की जिंदगी बदल रही है।”

राहुल से सिली चप्पल की कीमत: रामचेत ने बताया कि राहुल ने सिली चप्पल के लिए 1 लाख रुपये तक के ऑफर मिले, लेकिन वे बेचने को तैयार नहीं। दुकान पर लोग घूमने लगे, और रामचेत सुर्खियों में आए।

हकीकत: बीमारी ने सब बिगाड़ दिया, बिहार चुनाव में सवाल उठे

अभी की स्थिति: आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रामचेत अब बीमार हैं और बिस्तर पर हैं। बेटे विष्णु कुमार ने बताया, “मशीन से काम बढ़ा, लेकिन अब दुकान धीमी है। पिता की तबीयत खराब होने से ग्राहक कम हो गए। कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है।” एनडीटीवी की पड़ताल में रामचेत ने कहा, “मदद से जीवन बदला, लेकिन स्थायी नहीं। ब्रांड की योजना रुकी हुई है।” टीवी9 ने पुष्टि की कि दुकान अब पहले जितनी चमकदार नहीं, और परिवार संघर्ष कर रहा है।

बिहार चुनाव में जिक्र: राहुल ने बेगूसराय (3 नवंबर) में मछुआरों के साथ मछली पकड़ते हुए रामचेत का उदाहरण दिया, लेकिन यह वीडियो वायरल होने पर तेज प्रताप यादव जैसे नेताओं ने तंज कसा: “राहुल रसोइया बनें, नेतागिरी छोड़ें।” BJP ने इसे ‘ड्रामा’ बताया। कांग्रेस का दावा है कि यह छोटी मदद का बड़ा असर दिखाता है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स दावे पर सवाल उठा रही हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? छोटी मदद vs सिस्टमिक चेंज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामचेत की कहानी प्रेरणादायक है, लेकिन बिना सरकारी सपोर्ट (जैसे लोन, ट्रेनिंग) के यह टिकाऊ नहीं। कांग्रेस इसे ‘न्याय’ का प्रतीक बता रही है, जबकि विपक्ष ‘फोटो ऑप’ कह रहा है। रामचेत का परिवार अब स्थानीय मदद की उम्मीद कर रहा है।

यह मामला बिहार चुनाव में दलित-ओबीसी वोटबैंक पर असर डाल सकता है। अगर राहुल का दावा साबित न हुआ, तो महागठबंधन को नुकसान। अपडेट्स के लिए बने रहें!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *