चारधाम शीतकालीन यात्रा 2025: 24 अक्टूबर से शुरू, सरकार ने तैयारियां पूरी, जानें नए दर्शन स्थल और यात्रा का पूरा शेड्यूल
चारधाम शीतकालीन यात्रा 2025: 24 अक्टूबर से शुरू, सरकार ने तैयारियां पूरी, जानें नए दर्शन स्थल और यात्रा का पूरा शेड्यूल
चारधाम यात्रा 2025 का मुख्य सत्र समाप्त होने के बाद अब शीतकालीन यात्रा की शुरुआत हो रही है। उत्तराखंड सरकार ने चारों धामों के शीतकालीन दर्शन स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। 24 अक्टूबर से यह यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी, जब भक्त शीतकालीन मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच सकेंगे। इस दौरान चारों धामों की मूर्तियां अपने-अपने शीतकालीन निवास पर विराजमान रहेंगी, जहां भक्तों को दर्शन का अवसर मिलेगा। यह यात्रा अप्रैल 2026 तक चलेगी, और सरकार ने सड़क कनेक्टिविटी, आवास, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। इस साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यात्रा की, और शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए नई बस सेवाएं और गाइडेड टूर्स शुरू हो रहे हैं।
उत्तराखंड पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शीतकालीन यात्रा को “विंटर चारधाम यात्रा” नाम दिया गया है, जो साल भर दर्शन की सुविधा प्रदान करती है। सरकार ने 200 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर रोड्स को मजबूत किया है, और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम को अपडेट किया है। भक्तों को सलाह दी जा रही है कि ठंड के मौसम में गर्म कपड़े, दवाइयां और आईडी प्रूफ साथ रखें।
शीतकालीन यात्रा का पूरा शेड्यूल: कब-कहां होंगे दर्शन?
चारों धामों के कपाट बंद होने के बाद मूर्तियां शीतकालीन स्थलों पर स्थानांतरित हो जाती हैं। यहां यात्रा का अनुमानित शेड्यूल है (पंचांग के अनुसार थोड़ा बदलाव संभव):
– गंगोत्री धाम: कपाट 22 अक्टूबर (आज) को बंद। मां गंगा की पवित्र डोली मुखवा (मुखीमठ) गांव के लिए रवाना। दर्शन 24 अक्टूबर से शुरू। मुखवा में गंगा मंदिर में विराजमान रहेंगी। यात्रा अवधि: 6 महीने।
– यमुनोत्री धाम* कपाट 23 अक्टूबर (भाई दूज) को बंद। मां यमुना की डोली खरसाली गांव के लिए रवाना। दर्शन 24 अक्टूबर से। खरसाली में यमुना मंदिर में पूजा-अर्चना।
– केदारनाथ धाम: कपाट 23 अक्टूबर (भाई दूज) को सुबह 8:30 बजे बंद। भगवान शिव की डोली ऊखीमठ (उखीमठ) के लिए प्रस्थान। दर्शन 24 अक्टूबर से। ऊखीमठ के ऋषि नाथ मंदिर में विराजमान। फूलों से सजावट और विशेष आरती होगी।
– बद्रीनाथ धाम: कपाट 25 नवंबर को बंद। भगवान विष्णु की मूर्ति पांडुकेश्वर (जोशीमठ) के लिए स्थानांतरित। दर्शन 26 नवंबर से। जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में दर्शन। इससे पहले 21 नवंबर से पंच पूजा शुरू होगी।
नोट: यात्रा की शुरुआत 24 अक्टूबर से हो रही है, लेकिन बद्रीनाथ के लिए थोड़ा इंतजार। सभी स्थलों पर दर्शन का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।
सरकार की तैयारियां: क्या-क्या सुविधाएं?
उत्तराखंड सरकार ने शीतकालीन यात्रा को सफल बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं:
– परिवहन: 50 नई बसें और हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू। हरिद्वार-ऋषिकेश से स्पेशल ट्रांसपोर्ट। ऑनलाइन बुकिंग gmvn.gov.in पर उपलब्ध।
– आवास और भोजन: शीतकालीन स्थलों पर 1,000 अतिरिक्त रूम। सस्ते दरों पर होमस्टे और धर्मशालाएं। अन्नकूट भोज की व्यवस्था।
– स्वास्थ्य और सुरक्षा: 20 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, ऑक्सीजन सिलेंडर और एम्बुलेंस। हेल्पलाइन: 0135-2441629। कोविड प्रोटोकॉल के साथ मास्क अनिवार्य।
– रजिस्ट्रेशन: ऑनलाइन अनिवार्य। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए प्राथमिकता। फीस: ₹150-500 प्रति व्यक्ति।
– पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक-मुक्त यात्रा। इको-फ्रेंडली गाइडलाइंस।
यात्रा का महत्व और टिप्स
शीतकालीन यात्रा कम भीड़ और शांत वातावरण का फायदा देती है। यह आस्था के साथ-साथ हिमालयी संस्कृति का अनुभव कराती है। टिप्स:
– कैसे पहुंचें: हरिद्वार/देहरादून एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से बस/टैक्सी। मुखवा-खरसाली 4-5 घंटे का सफर।
– सावधानियां: ठंड से बचाव के लिए थर्मल्स, दस्ताने। ऊंचाई रोग के लिए डॉक्टर से सलाह। मौसम अपडेट चेक करें।
– लागत: 3-4 दिन का पैकेज ₹15,000-25,000 (दो व्यक्ति)। हेलीकॉप्टर से ₹50,000+।
चारधाम शीतकालीन यात्रा आस्था का नया द्वार खोल रही है। यदि आप यात्रा प्लान कर रहे हैं, तो जल्द बुक करें।
