गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद: मां गंगा की पवित्र डोली मुखवा के लिए रवाना, चारधाम यात्रा का समापन शुरू
गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद: मां गंगा की पवित्र डोली मुखवा के लिए रवाना, चारधाम यात्रा का समापन शुरू
हिमालय की गोद में बसे गंगोत्री धाम के कपाट आज गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के पावन अवसर पर शीतकाल के लिए बंद हो गए। सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के द्वार बंद किए गए, और मां गंगा की पवित्र उत्सव मूर्ति को डोली में स्थापित कर शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा (मुखीमठ) गांव के लिए रवाना किया गया। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जब बर्फीली हवाओं से बचने के लिए देवी मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है। इस दौरान धाम जयकारों से गूंज उठा, और हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा को विदाई दी। चारधाम यात्रा 2025 का समापन अब तेजी से हो रहा है, जो अगले साल अक्षय तृतीया (अप्रैल 2026) पर फिर खुलेगा।
गंगोत्री धाम को 3 क्विंटल फूलों से सजाया गया था, और कपाट बंद होने से पहले भव्य आरती उतारी गई। मां गंगा की डोली शाम तक मुखवा पहुंचेगी, जहां स्थानीय पुजारियों का स्वागत होगा। यह समारोह धाम की पवित्रता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है।
समारोह की मुख्य झलकियां
– पूजा और बंदन: सुबह 11:36 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट बंद। गंगा मंदिर में विशेष पूजा, चंदन-अर्पण और आरती हुई। श्रद्धालुओं ने “जय गंगे, जय गंगोत्री” के जयकारे लगाए।
– डोली का प्रस्थान: मूर्ति को डोली में स्थापित कर श्रद्धालुओं ने मंगल पथ पर विदाई दी। मुखवा में 6 महीने दर्शन होंगे, जहां गंगा मंदिर में विराजमान रहेंगी।
– श्रद्धालुओं की भीड़: इस साल 7 लाख 57 हजार से ज्यादा भक्त गंगोत्री पहुंचे। कपाट बंद होने से पहले भीड़ बढ़ गई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही।
– पर्यावरण संरक्षण: समिति ने प्लास्टिक-मुक्त समारोह रखा, और श्रद्धालुओं को हरी यात्रा का संदेश दिया।
चारधाम यात्रा 2025 का समापन कैलेंडर
– गंगोत्री: 22 अक्टूबर (आज) – शीतकालीन दर्शन मुखवा में।
– यमुनोत्री: 23 अक्टूबर (भाई दूज), दोपहर 12:30 बजे – दर्शन खरसाली गांव में।
– केदारनाथ: 23 अक्टूबर (भाई दूज) – दर्शन उद्धव कुटीर में।
– बद्रीनाथ: 25 नवंबर – दर्शन ज्योतिर्मठ (नृसिंह मंदिर) और पांडुकेश्वर में।
महत्व और परंपरा
गंगोत्री धाम गंगा नदी का उद्गम स्थल है, जहां भगीरथ ने तपस्या कर गंगा को धरती पर लाया। शीतकाल में बर्फबारी से धाम अवरुद्ध हो जाता है, इसलिए यह परंपरा चली आ रही है। इस साल यात्रा सफल रही, और कुल 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चार धाम पहुंचे। उत्तराखंड सरकार ने अगले साल की यात्रा के लिए पहले से बुकिंग शुरू कर दी है।
यह समापन आस्था और प्रकृति के संतुलन का संदेश देता है।
